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कोल इंडिया के 1500 करोड़ रुपये का बकायेदार है राज्य विद्युत उत्पादन निगम

लखनऊ: उत्तर प्रदेश समेत देशभर में इन दोनों कोयले का संकट बरकरार है. ज्यादातर उत्पादन इकाइयों में काफी कम मात्रा में कोयले का स्टॉक है. ऐसे में जल्द हालात नहीं सुधरे तो उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना कर पड़ सकता है. कोयले की कमी के पीछे भले ही खदानों में पानी भरने को वजह बताया जा रहा हो, लेकिन असलियत कुछ और ही है. हकीकत यह है कि राज्य विद्युत उत्पादन निगम कोल इंडिया का 1,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्जदार है. कोल इंडिया प्रबंधन का कहना है कि कोयले की कोई कमी नहीं है. कोयले की आपूर्ति भी नहीं रोकी गई है. प्राथमिकता भुगतान करने वालों को दी जा रही है.

नेशनल कोल लिमिटेड को उत्पादन निगम की तरफ से अक्टूबर में नौ दिन के कोयले की आपूर्ति के लिए 85 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 13 दिन से ज्यादा समय हो गया है. अगर एनसीएल की ओर से कोयले की आपूर्ति रोक दी गई तो राज्य विद्युत उत्पादन निगम की सबसे बड़ी 2,630 मेगावाट की परियोजना से भी उत्पादन ठप हो जाएगा. अगर ऐसा होता है तो निश्चित तौर पर प्रदेश में बड़ा बिजली संकट खड़ा हो जाएगा. अनपरा परियोजना में कोयले के स्टॉक में गिरावट का क्रम अब भी जारी है. प्रबंधन को राहत मिलने के बजाय उसकी दिक्कतें बढ़ रही हैं.

कोयले की कमी के चलते अनपरा ए व बी परियोजना को इकाइयों को लगातार कम लोड पर संचालित किया जा रहा है. इससे हर रोज छह मिलियन यूनिट से ज्यादा का बिजली का नुकसान हो रहा है. पावर कॉरपोरेशन को अनपरा परियोजना की सभी इकाइयों की बिजली तीन रुपए प्रति यूनिट से भी कम कीमत पर उपलब्ध होती है. कोयले की कमी के चलते बिजली विभाग को महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. तापीय परियोजनाओं से उत्पादन बंद होने के कारण सरकार को एनर्जी एक्सचेंज से पीक ऑवर में 14 से 15 रुपए प्रति यूनिट तक बिजली खरीदनी पड़ रही है. पावर कॉरपोरेशन पर बिजली के एवज में उत्पादन निगम का तकरीबन आठ करोड़ रुपए से ज्यादा का बकाया है. पावर कॉरपोरेशन के उत्पादन निगम को भुगतान न करने से दिक्कत और बढ़ गई है.

तापीय इकाइयों में कोयले की कमी है तो भीषण गर्मी में बिजली की मांग में बड़ा इजाफा हो रहा है. 19 हजार मेगावाट के पार उत्तर प्रदेश में लगातार बिजली की मांग है. तापीय परियोजनाओं से उत्पादन में कमी के चलते प्रदेश के ग्रामीण और शहरी इलाकों में बिजली संकट बरकरार है. इन हालात में मुनाफाखोरी भी चरम पर है. यहां पावर एक्सचेंज सात रुपए से लेकर 20 रुपए तक बिजली बेच रहा और जिन राज्यों को बिजली की जरूरत है, वह खरीद रहे हैं. उत्तर प्रदेश में पावर कार्पोरेशन ने बिजली कटौती रोकने के लिए औसत 16.50 रुपए प्रति यूनिट बिजली खरीदी है. एक्सचेंज में 20 रुपया प्रति यूनिट में जो बिजली बेची जा रही, उसकी वास्तविक लागत छह रुपया प्रति यूनिट से भी कम है.

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