काशी से जेवर तकः उत्तर प्रदेश की टेक्नोक्रांति

राज्य में युवा शक्ति की यह क्षमता तकनीकी क्षेत्र में स्पष्ट दिखाई देती है। साढ़े नौ वर्ष के भीतर देश के करीब 60 प्रतिशत मोबाइल फोन और 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट के उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी हो गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 3,800 करोड़ से बढ़कर 45 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच चुका है और लक्ष्य 2030 तक दो लाख करोड़ का है। जेवर में 3,706 करोड़ रुपये की एचसीएल-फॉक्सकॉन चिप इकाई बन रही है। 644 मेगावाट के डेटा सेंटर प्रस्ताव आ चुके हैं, और प्रदेश में 24,000 से अधिक स्टार्टअप और आठ यूनिकॉर्न हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शब्दों में कहा जाए तो यात्रा मोबाइल से मॉड्यूल और मॉड्यूल से माइक्रोचिप तक पहुंच रही है।
टेक्नोलाजी को लेकर लखनऊ की महत्वाकांक्षा भी कम नहीं है।
राजधानी को एआई, सेमीकंडक्टर, साइबर सिक्योरिटी और कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी का केंद्र बनाने और 50 विश्वस्तरीय एआई स्टार्टअप खड़े करने का योगी सरकार का लक्ष्य है। आईटी-आईटीईएस निर्यात को अगले चार वर्षों में 2.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का भी संकल्प चुनौतीपूर्ण तो है लेकिन यदि पांच वर्षों में निर्यात दोगुने से अधिक हो सकता है तो यह भी असंभव नहीं। इसी पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री का जापान और सिंगापुर का दौरा देखा जाना चाहिए। इस यात्रा में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में 500 एकड़ में जापान सिटी विकसित करने और इन्वेस्ट यूपी के जापान डेस्क को सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय की निगरानी में मजबूत करने की घोषणा महत्वपूर्ण है। जापान के साथ इस आर्थिक साझेदारी की जड़ें उस रिश्ते में हैं जो काशी से शुरू हुई थीं और आबे मेमोरियल कारिडोर इस रिश्ते को और मजबूत करने वाला स्तंभ है।
उपभोक्ता से उत्पादक बनने का अर्थ केवल उद्योग लगाना नहीं, सोच बदलना है। उत्पादक पहल करता है, जोखिम उठाता है और मूल्य सृजित करता है। गीता का ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते’ यही कहता है कि अधिकार कर्म पर है, परिणाम पर नहीं। प्रदेश के युवाओं ने स्टार्टअप, कोडिंग लैब और कारखानों की शॉप फ्लोर पर यही कर्म-संस्कृति अपनानी शुरू कर दी है। इसलिए एक लाख करोड़ का निर्यात मंजिल नहीं, एक पड़ाव है जिसकी दिशा स्पष्ट है। जेवर की चिप इकाई, लखनऊ के आईटी पार्क, प्रस्तावित जापान सिटी और काशी के रुद्राक्ष में बसा आबे मेमोरियल कॉरिडोर, ये सब मिलकर एक नए उत्तर प्रदेश का नक्शा गढ़ रहे हैं, जिसकी पृष्ठभूमि में राज्य का आर्थिक भूगोल है।



