बांदा के किसानों को MSP बढ़ोतरी से 5.35 करोड़ का लाभ

केंद्र सरकार के रबी विपणन सीजन 2027-28 के लिए MSP बढ़ाने के फैसले का असर बांदा के किसानों पर भी पड़ने वाला है। जिले में रबी की प्रमुख फसलों में गेहूं, चना, मसूर और सरसों शामिल हैं।
नई दरों के अनुसार गेहूं का MSP 2,585 रुपये से बढ़कर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। चने का MSP 5,875 से बढ़कर 5,958 रुपये, मसूर का 7,000 से बढ़कर 7,390 रुपये और रेपसीड-सरसों का MSP 6,200 से बढ़कर 6,613 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है।
MSP में सबसे ज्यादा 675 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कुसुम के लिए की गई है। हालांकि बांदा में कुसुम की खेती नहीं होने के कारण जिले के किसानों को इसका सीधा लाभ मिलने की संभावना नहीं है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बांदा में करीब 3.39 लाख किसान हैं और लगभग 3.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की खेती की जाती है। गेहूं जिले की प्रमुख रबी फसल है, जबकि चना, मसूर और सरसों का भी महत्वपूर्ण उत्पादन होता है।
बीते वर्ष के उत्पादन को आधार मानते हुए गेहूं में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी से करीब 1.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ अनुमानित है। वहीं चने में लगभग 1.26 करोड़ और मसूर में करीब 1.62 करोड़ रुपये के अतिरिक्त लाभ का अनुमान लगाया गया है।
सरसों के उत्पादन पर भी MSP बढ़ोतरी का असर दिखाई देगा। पिछले वर्ष के उत्पादन और नई MSP वृद्धि के आधार पर जिले में सरसों किसानों को करीब 97 लाख रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलने का अनुमान है।
इन सभी प्रमुख रबी फसलों को जोड़ने पर बांदा के किसानों के लिए करीब 5 करोड़ 35 लाख रुपये के अतिरिक्त लाभ का अनुमान सामने आया है। यह अनुमान पिछले साल के उत्पादन स्तर के आसपास उत्पादन रहने की स्थिति पर आधारित है।
नई MSP दरों में मसूर और सरसों की बढ़ोतरी गेहूं की तुलना में काफी अधिक है। ऐसे में जिले में कुछ किसान अधिक MSP वाली दलहन और तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने पर भी विचार कर सकते हैं।
केंद्र सरकार के अनुसार MSP में बढ़ोतरी का उद्देश्य किसानों को उत्पादन लागत पर लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना और दलहन-तिलहन के उत्पादन को प्रोत्साहित करना भी है। रबी सीजन 2027-28 के लिए घोषित छह फसलों में कुसुम को सबसे अधिक 675 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी मिली है।



