लखनऊ नगर निगम में नामांतरण के 206 मामले लंबित, सीएम डैशबोर्ड से खुलासा

सीएम डैशबोर्ड पर लंबित मामलों की जानकारी सामने आने के बाद नगर निगम में संबंधित पत्रावलियों की जांच शुरू की गई है। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी विनय राय ने जोनल अधिकारियों को पत्र भेजकर प्रत्येक मामले की स्पष्ट और तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में देरी के वास्तविक कारणों और फाइल के लंबित रहने की अवधि का विवरण देना होगा।
नगर निगम के आठ जोन में लंबित नामांतरण मामलों की संख्या अलग-अलग है। जोन छह में सबसे अधिक 73 मामले सामने आए हैं। जोन पांच में 26, जोन एक और तीन में 25-25, जोन आठ में 25, जोन दो में 14, जोन सात में 11 और जोन चार में सात मामले लंबित हैं।
नामांतरण की प्रक्रिया में देरी को लेकर भवन स्वामियों की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। रिपोर्ट में जोन एक के एक भवन स्वामी की शिकायत का उल्लेख है, जिसमें म्यूटेशन कराने के लिए डेढ़ लाख रुपये मांगने का आरोप लगाया गया था। यह आरोप है, जिसकी पुष्टि संबंधित जांच और आधिकारिक कार्रवाई के आधार पर ही हो सकती है।
नगर निगम प्रशासन ने अधिकारियों से यह भी बताने को कहा है कि लंबित फाइलों में कोई कमी थी तो आवेदकों को इसकी जानकारी दी गई या नहीं। यदि किसी स्तर पर अनावश्यक देरी हुई है, तो संबंधित कर्मचारी या अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने और स्पष्टीकरण लेने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
नामांतरण संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े नगर निगम के रिकॉर्ड में बदलाव की प्रक्रिया है। इस काम में देरी होने से भवन स्वामियों को प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। नगर निगम की ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद लंबित मामलों का सामने आना प्रक्रिया की निगरानी और समयबद्ध निस्तारण की जरूरत को रेखांकित करता है।
अब संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि 206 मामले किन कारणों से लंबित रहे और उनका निस्तारण कब तक किया जाएगा। सीएम डैशबोर्ड के जरिए निगरानी का उद्देश्य सरकारी सेवाओं की प्रगति पर नजर रखना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। भवन स्वामी अपने आवेदन की स्थिति लखनऊ नगर निगम के आधिकारिक म्यूटेशन पोर्टल पर भी देख सकते हैं: नामांतरण पोर्टल।



