उत्तर प्रदेशलखनऊ

पुलिस कर्मियों की सदन में पेशी की परंपरा गलत : अखिलेश यादव

लखनऊ। विधानसभा में शुक्रवार को अदालत लगाने और पुलिस कर्मियों की पेशी को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने गलत बताया है। अखिलेश यादव ने सदन की कार्यवाही में जाते हुए मीडिया से विधानसभा में आज विधायक विशेषाधिकार हनन मामले पर सवाल किया। पूछा कि प्रदेश में तत्कालीन 2004 में सपा की सरकार थी और नेताजी मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे, उस समय प्रदेश में बिजली की समस्या को लेकर प्रदर्शन कर रहे भाजपा नेताओं पर लाठीचार्ज किया गया था। आज इस मामले में सदन के अंदर अदालत लगी है और छह तत्कालीन पुलिसकर्मियों की पेशी की जा रही है। सवाल का जवाब देते हुए अखिलेश ने कहा कि यह पंरपरा गलत है।

उल्लेखनीय है कि साल 2004 में कानपुर में बिजली की समस्या को लेकर प्रदर्शन के दौरान सलिल विश्नोई और बीजेपी कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया गया था। अब विधानसभा ने संविधान की धारा-194(3) के तहत की कार्यवाही की गई है। सलिल विश्नोई वर्तमान समय में विधान परिषद सदस्य हैं। मामले में शुक्रवार को विधानसभा न्यायालय में तब्दील कर सुनवाई की गई। इस दौरान विधायक विशेषाधिकार हनन मामले में सदन के अंदर लगी कोर्ट में सेवानिवृत हो चुके तत्कालीन क्षेत्राधिकारी बाबू पुरवा कानपुर अब्दुल समद, तत्कालीन थानाध्यक्ष किदवई नगर ऋषि कांत शुक्ला, तत्कालीन उप निरीक्षक थाना कोतवाली कानपुर त्रिलोकी सिंह, तत्कालीन कांस्टेबल थाना किदवई नगर छोटे सिंह यादव, तत्कालीन कांस्टेबल थाना काकादेव विनोद मिश्र, तत्कालीन कांस्टेबल मेहरबान सिंह यादव को कटघरे में खड़ा किया।

विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने सदन में प्रस्ताव रखा। यूपी सरकार के मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने सदन से इस मामले में उदारता दिखाने की अपील की। इस मामले में सभी दल एकजुट दिखे। सर्वसम्मति से सजा का प्रस्ताव पारित हुआ। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने फैसला सुनाया। दोषी पुलिस कर्मियों को एक दिन साधारण कारावास (आज रात 12 बजे तक) भेजा गया है। इस अवधि तक पुलिस कर्मियों को विधानसभा के लॉकअप में रखा जायेगा।

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