35 साल की सेवा के बाद डीजल इंजनों को भावुक विदाई, लखनऊ में यादगार समारोह

भारतीय रेलवे के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले डीजल इंजनों को लखनऊ में भावुक माहौल के बीच विदाई दी गई। करीब 35 वर्षों तक यात्रियों और मालगाड़ियों को अपनी मंजिल तक पहुंचाने वाले इन इंजनों का अंतिम सफर रेलकर्मियों, अधिकारियों और रेल प्रेमियों के लिए यादगार बन गया।
लंबे समय तक रेलवे संचालन की रीढ़ रहे डीजल इंजनों ने देश के विभिन्न हिस्सों में परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। बदलती तकनीक और रेलवे के विद्युतीकरण अभियान के चलते अब इन इंजनों की जगह आधुनिक इलेक्ट्रिक इंजन ले रहे हैं, जो अधिक ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल माने जाते हैं।
विदाई समारोह के दौरान रेलकर्मियों ने इन इंजनों से जुड़ी यादों को साझा किया। कई कर्मचारियों ने दशकों तक इन इंजनों के साथ काम किया और उन्हें रेलवे परिवार का अभिन्न हिस्सा बताया। अंतिम रन के दौरान मौजूद लोगों ने तस्वीरें और वीडियो बनाकर इस ऐतिहासिक पल को संजोया।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रेलवे का तेजी से हो रहा विद्युतीकरण परिचालन लागत कम करने, गति बढ़ाने और प्रदूषण घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि डीजल इंजनों का योगदान रेलवे के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा, क्योंकि उन्होंने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लंबी दूरी के मार्गों पर वर्षों तक सेवाएं दीं।
लखनऊ में आयोजित यह विदाई समारोह केवल एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के एक गौरवशाली अध्याय को सम्मानपूर्वक अलविदा कहने का अवसर भी था। डीजल इंजनों की गूंज भले अब कम सुनाई दे, लेकिन रेल इतिहास में उनकी भूमिका हमेशा अमिट रहेगी।



