उत्तर प्रदेशबहराइच

स्वास्थ्य,पोषण व आरंभिक विकास की यात्रा से रूबरू हुए स्वास्थ्य कार्यकर्ता 

  • एचबीवाईसी कार्यक्रम के तहत 15 माह तक के बच्चों की होगी देखभाल

बहराइचl होम बेस्ड केयर फॉर यंग चाइल्ड( एचबीवाईसी) कार्यक्रम के तहत आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा हैl प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता गृह भ्रमण के दौरान 3 से 15 माह तक के बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण के साथ-साथ जलीय स्वच्छता, पर्यावरणीय स्वच्छता व व्यक्तिगत स्वच्छता का महत्व भी बताएंगी। इस प्रयास से जहां बाल्यकाल में होने वाली बीमारियों में कमी आएगी वहीं बच्चों के पोषण स्तर में सुधार व शारीरिक, मानसिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

यह बातें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोतीपुर में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सतीश कुमार सिंह ने कही।उन्होंने बताया कि जनपद में सभी आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पांच दिवसीय एचबीवाईसी प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसी क्रम में मिहींपुरवा ब्लॉक में कुल 15 बैचों में 450 स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा । इनमें 5 बैच का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है । प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश ,जिला व ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षण की गुणवत्ता व तकनीकी सहयोग में यूनिसेफ़ के मंडलीय प्रबन्धक साकेत शुक्ला का विशेष सहयोग रहता है।

सीएचसी अधीक्षक डॉ रोहित कुमार ने बताया प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता तीन से 15 माह के बच्चों के स्वास्थ्य ,स्वच्छता व पालन-पोषण की निगरानी करेंगी । इस प्रयास से बाल्यकाल में होने वाली बीमारियां जैसे निमोनिया , डायरिया व कुपोषण आदि पर रोकथाम लगेगीl
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षक डॉ बृजेश सिंह ने बताया कि तीन माह का बच्चा परिचित व्यक्ति को देखकर नहीं मुस्कराता, अचानक ज़ोर की आवाज से चौकता या रोता नहीं, स्तनपान या बात करते समय मां से आंख नहीं मिलाता, बच्चे के हाथ-पांव व गर्दन की मांसपेशियों में अकड़न या सर पीछे की तरफ झुक जाता है तो  बच्चे को तुरंत चिकित्सक से दिखाना चाहिए।

प्रशिक्षक चंदरेश्वर पाठक ने बताया कि नौ माह के बच्चे का लेटे रहने पर पलट नहीं पाना, सरल शब्द जैसे पा , माँ बा आदि नहीं बोल पाना ,बैठने के लिए सहारे की जरूरत महसूस करना ,आवाज की दिशा में मुड़ नहीं पाना , वस्तुओं को देखने के लिए हर बार सिर को एक ही तरफ झुकाना । वहीं बारह माह का बच्चा ऊंगली और अंगूठे से छोटी चीजें नहीं उठा पाना , अपने सामने छिपाए हुए खिलौने को भी नहीं खोज पाना, गोद में जाने के लिए हाथ नहीं बढ़ाना , नाम बुलाने पर भी नहीं सुनना या कोई प्रतिक्रिया नहीं करना, लुका-छिपी जैसे खेल नहीं खेलना ऐसे लक्षण किसी गंभीर समस्या के चेतावनी चिन्ह हैं। बच्चे को तुरंत चिकित्सक से दिखाना चाहिए। कार्यक्रम में बीसीपीएम अजय यादव , प्रशिक्षक ओमप्रकाश पाठक, बीपीएम , एएनएम व आशा संगिनी उपस्थित रहे।

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