JPNIC को संजीवनी, योगी सरकार का मास्टरप्लान; सपा के आरोपों पर पलटवार

लखनऊ का JPNIC लंबे समय से अधूरा पड़ा हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में शुरू हुई इस परियोजना पर 2017 के बाद काम ठप हो गया था। अब योगी सरकार ने इसे पुनर्जीवित करने के लिए नया मॉडल तैयार किया है।
सरकार की योजना के तहत निजी कंसोर्टियम को JPNIC के संचालन और अधूरे कार्यों को पूरा करने की जिम्मेदारी देने का रास्ता अपनाया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक परियोजना पर पहले ही सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और अब अधूरे काम को पूरा करने के लिए निजी निवेश का सहारा लिया जाएगा।
JPNIC में कन्वेंशन सेंटर, ऑडिटोरियम, स्पोर्ट्स सुविधाएं और पार्किंग जैसी कई महत्वपूर्ण सुविधाएं प्रस्तावित हैं। सरकार का तर्क है कि लंबे समय से अधूरी पड़ी संपत्ति को सक्रिय करने से लखनऊ को आधुनिक सार्वजनिक और खेल सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
JPNIC को लेकर सियासी विवाद भी तेज हो गया है। अखिलेश यादव ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे सार्वजनिक संपत्ति को निजी हाथों में देने का आरोप लगाया है। उन्होंने यहां तक कहा है कि यदि सरकार इसे वापस लेना चाहे तो वह निजी बोली से एक रुपये अधिक देने को तैयार हैं।
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने JPNIC परियोजना को लेकर पिछली समाजवादी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हुआ और परियोजना का इस्तेमाल जनहित के बजाय निजी सुविधाओं के लिए किया गया।
JPNIC का मामला अब केवल एक अधूरी निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है। यह यूपी में सरकारी संपत्तियों के उपयोग, निजी भागीदारी, सार्वजनिक धन और राजनीतिक विरासत से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। सरकार के नए मॉडल से अब इस लंबे समय से अटकी परियोजना को पूरा करने की उम्मीद बढ़ी है।



