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11 साल बाद दुष्कर्म आरोपी बरी, HC ने साक्ष्यों के अभाव में दिया फैसला


हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 11 वर्षों से जेल में बंद दुष्कर्म के आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता और न्यायिक प्रक्रिया में प्रमाणों का मजबूत होना आवश्यक है। इस मामले में लंबे समय तक आरोपी जेल में रहा, लेकिन अंततः साक्ष्यों की कमी के चलते उसे राहत मिली।
यह फैसला न्याय प्रणाली में साक्ष्यों के महत्व को एक बार फिर रेखांकित करता है। साथ ही यह भी दर्शाता है कि अदालतें निष्पक्ष सुनवाई के आधार पर ही अपना निर्णय देती हैं, जिससे न्याय की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है।