अमेठीउत्तर प्रदेश

अध्यापक के कंधों पर युग निर्माण का दायित्व।

 

गौरीगंज। 4 जून 2022 युगतीर्थ शांन्तिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में रणंजय इंटर कॉलेज, गौरीगंज के मनीषी सभागार में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की एक आवश्यक बैठक आहूत की गई। शांन्तिकुंज के प्रतिनिधि श्री राम केवल यादव मुख्य अतिथि के रूप के उपस्थित रहे तथा पंडित जगदम्बा प्रसाद त्रिपाठी मनीषी जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता किया।

युगतीर्थ शांन्तिकुंज हरिद्वार का संदेश देते हुए समर बहादुर सिंह ने नींव के पत्थरों, ये मिशन का भवन, युग युगों तक तुम्हारा रहेगा ऋणी गीत गाकर उपस्थिजनों को भाव-विभोर कर दिया। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा उत्तर प्रदेश के प्रांतीय सदस्य एवं जिला संयोजक श्री राधेश्याम तिवारी ने कार्यक्रम के उद्देश्य की चर्चा करते हुए बताया कि जनपद में भारतीय संस्कृति मंडल का गठन कर विद्यार्थियों का व्यक्तित्व परिष्कार, शिक्षकों का गरिमा शिविर आयोजित कर राष्ट्र को सशक्त, समर्थ और समृद्ध बनाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित है। इसी क्रम में पूरे प्रदेश में एक साथ 15 अक्टूबर को भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। भारतीय संस्कृति घर-घर पहुँचे, हमारी पीढ़ी सुसंस्कारित हो। भारत की गौरवशाली सभ्यता और संस्कृति ही इस देश को पुनः विश्वगुरु बनाएगी और यह कार्य जमीनी स्तर पर गायत्री परिवार कर रहा है। उन्होंने सभी शिक्षकों का आवाहन करते हुए कहा कि अध्यापक युग निर्माता है और युग निर्माण की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी अध्यापकों के कंधों पर है।

मुख्य अतिथि श्री राम केवल यादव ने कहा कि परम् वंदनीया माता जी ने 1985-86 में कहा था तुम्हारे जन्म जन्मांतर के बिछड़े भाई बहन किसी न किसी मोड़ पर मिलेंगे और हम सब गायत्री परिवार से जुड़कर जिस मोड़ पर मिले हैं, वहाँ से हम सबका एक की लक्ष्य है युग निर्माण। युग निर्माण योजना एक दैवीय योजना है, ऋषियों का संरक्षण है, देवी देवताओं का आशीर्वाद है। हम सभी का परम सौभाग्य है कि हम इस महान योजना के अंग बन सके है। परम् पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने तीन नारे दिये है 21वीं सदी उज्ज्वल भविष्य, 21वीं सदी नारी सदी व 21वीं सदी सतयुग की वापसी। सतयुग का समय नज़दीक है, ऐसे संकेत दिखने शुरू हो गए हैं कि राज तंत्र और जन तंत्र दोनों की दिशा और धारा बदल रही है। 21वीं सदी का भार उठाने वाला हमारे बच्चे होंगे इसलिये गुरुदेव ने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की योजना बनाई और इस योजना की ज़िम्मेदारी गुरुजनों के कंधों पर है। वर्तमान पीढ़ी को सिर्फ शिक्षा की ही नहीं बल्कि विद्या की भी आवश्यकता है। आज विद्या लुप्त हो गई है जिसको पुनर्जागृत करने का काम गायत्री परिवार कर रहा है। स्काउट गाइड के कमिश्नर श्री मान सिंह ने भारतीय संस्कृति की पुनर्स्थापना के संकल्प के साथ छात्रों को संस्कारों से जोड़ने के लिए गायत्री परिवार के साथ पूरी ऊर्जा के साथ हर तरह का सहयोग करने की घोषणा की।

जिला समन्वयक डॉ० त्रिवेणी सिंह ने कहा कि आज हर क्षेत्र में गायत्री परिवार कार्य कर रहा है। विद्या विस्तार हमारा एक प्रमुख अभियान है और भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के माध्यम से सार्थक प्रयास किया जा रहा है। अमेठी के अधिकांश विद्यालयों में यह परीक्षा कराई जाएगी साथ ही स्थानीय प्रशासन के सहयोग से छात्रों के नैतिक, चारित्रिक, बौद्धिक उत्थान हेतु व्यक्तित्व परिष्कार की कार्यशाला भी चलाई जाएगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पंडित जगदम्बा प्रसाद त्रिपाठी मनीषी जी ने भारत एक युवा देश है, यदि युवा संस्कारित हुआ तो राष्ट्र विश्व गुरु होगा किन्तु अगर ये युवा दिशाहीन और दिग्भ्रमित रहा तो राष्ट्र का पतन होगा। उन्होंने सशक्त राष्ट्र के चार मंत्र देते हुए कहा कि स्वस्थ युवा- सशक्त राष्ट्र, संस्कारित युवा- श्रेष्ठ राष्ट्र, स्वावलंबी युवा-सम्पन्न राष्ट्र, सेवाभावी युवा-सुखी राष्ट्र और युवाओं को ये दिशा देने की ज़िम्मेदारी हम सभी के कंधों पर है। ये बहुत बड़ी जिम्मेदारी अध्यापकों के कंधों पर है।

अंत मे प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष श्री अशोक कुमार मिश्र ने सभी एक आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान में सृजन और विध्वंश का युद्ध चल रह है और गायत्री परिवार के सैनिक सृजन के अभियान को लेकर चल रहा है इसलिये आप सभी का विशेष आभार।

इस अवसर पर प्रमुख रूप से उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष प्रेम प्रकाश मिश्र, जिला मंत्री डॉ० लाल सिंह, कोषाध्यक्ष देवी प्रसाद पाठक, डॉ० सुनील कुमार शुक्ल, युवा प्रभारी डॉ० प्रवीण सिंह दीपक, माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष शिव भूषण उपाध्याय, भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के अनिल कुमार श्रीवास्तव, रामदेव मौर्य, राजेन्द्र प्रसाद मिश्र, कमलेश पांडेय, अखिलेश तिवारी, राम यश मौर्य, गया बख्श सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, वेद प्रकाश श्रीवास्तव, श्रीनाथ तिवारी, जय प्रकाश दूबे आदि उपस्थित रहे।

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