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मुख्यमंत्री ने बजट खर्च में तेजी लाने के दिए निर्देश, अगले दो माह में 60 प्रतिशत व्यय का लक्ष्य

₹9.99 लाख करोड़ के बजट में ₹5.15 लाख करोड़ की स्वीकृतियां जारी

लखनऊ 27 सितम्बर:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में बजट प्राविधानों के सापेक्ष वित्तीय स्वीकृतियां जारी करने और व्यय की गति तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष की पहली छमाही समाप्त हो रही है, ऐसे में जिन विभागों में बजट खर्च की गति अपेक्षित नहीं है, वहां तत्काल सुधार किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अगले दो माह में हर हाल में 70 प्रतिशत वित्तीय स्वीकृतियां जारी हों और कुल आवंटित बजट के सापेक्ष कम से कम 60 प्रतिशत व्यय सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री रविवार शाम को एक महत्वपूर्ण बैठक में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की उपस्थिति में चालू वित्तीय वर्ष के बजट प्राविधानों, वित्तीय स्वीकृतियों और वास्तविक व्यय की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में प्रदेश के सर्वाधिक बजट वाले 30 प्रमुख विभागों के कार्यों और वित्तीय प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट का उद्देश्य केवल धनराशि आवंटित करना नहीं, उसका समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करते हुए उसका लाभ जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने वित्त मंत्री को निर्देश दिए कि विभागीय मंत्रियों के साथ बैठक कर बजट खर्च की नियमित और बिंदुवार समीक्षा करें। जिन विभागों में नीतिगत, प्रक्रियात्मक या तकनीकी कारणों से स्वीकृतियों अथवा व्यय में अड़चन आ रही है, उसका तत्काल समाधान कराया जाए। वित्त विभाग भी इसकी नियमित निगरानी करे और प्रगति की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराए।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बैंकों के क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात में सुधार पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र किसान को किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए गांववार और किसानवार मैपिंग कराई जाए, ताकि पात्र किसानों को चिन्हित कर उन्हें बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ा जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण की उपलब्धता बढ़ाने और बैंकिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘रूरल क्रेडिट कॉन्क्लेव’ जैसे आयोजनों की रूपरेखा तैयार करने के भी निर्देश दिए। स्थानीय उत्पादों और शिल्प को बाजार उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने एमएसएमई विभाग को प्रदेश के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की ब्रांडिंग और व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के स्थानीय उत्पादों की पहचान को देश और दुनिया के बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रभावी रणनीति के साथ काम किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जनहित की योजनाओं और विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता तथा समयबद्धता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कार्यों में अनावश्यक देरी या गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

केंद्र सहायतित योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन योजनाओं में भारत सरकार से धनराशि प्राप्त होनी है, उनमें विभागीय स्तर पर प्रभावी समन्वय किया जाए। उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्रिगण संबंधित केंद्रीय मंत्रियों से सीधे संवाद कर लंबित धनराशि और स्वीकृतियों से जुड़े विषयों का समाधान कराएं, ताकि केंद्रीय सहायता से संचालित योजनाओं की गति प्रभावित न हो। समीक्षा में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में उत्तर प्रदेश का कुल बजट ₹9,99,056.48 करोड़ है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में ₹1,58,474.15 करोड़ अधिक है। इसमें विकास योजनाओं के लिए ₹5,01,957.09 करोड़ का प्राविधान किया गया है। अब तक शासन स्तर से ₹5,15,918.44 करोड़, यानी 51.6 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की जा चुकी हैं। इनमें योजनाओं से संबंधित ₹2.13 लाख करोड़ से अधिक की स्वीकृतियां शामिल हैं। इसके सापेक्ष प्रदेश में अब तक ₹2,83,870.11 करोड़ का वास्तविक व्यय दर्ज किया गया है।

विभागवार समीक्षा में हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग का बजट व्यय के मामले में प्रदर्शन बेहतर रहा। विभाग द्वारा बजट के सापेक्ष 54 प्रतिशत व्यय किया जा चुका है। ऊर्जा विभाग में ₹73,348.56 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹41,541.93 करोड़ की वित्तीय स्वीकृतियां जारी की गई हैं, जो 50 प्रतिशत से अधिक है। बेसिक शिक्षा विभाग में ₹82,245.68 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹65,982.04 करोड़, यानी 80.2 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी की गई हैं और ₹31,718.92 करोड़ का व्यय हुआ है। गृह विभाग के लिए ₹43,891.37 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹40,502.28 करोड़, यानी 92.2 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी हो चुकी हैं और ₹14,712.68 करोड़ का व्यय हुआ है। लोक निर्माण विभाग में ₹45,270.69 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹27,375.91 करोड़, यानी 60.5 प्रतिशत की स्वीकृतियां जारी की गई हैं और ₹14,178.60 करोड़ का व्यय हुआ है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में ₹39,906.52 करोड़ के बजट के सापेक्ष ₹25,557.48 करोड़, यानी 64 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हुई हैं और ₹10,286.50 करोड़ का व्यय हुआ है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बजट का आकलन वास्तविक आवश्यकता और व्यावहारिक उपयोगिता के आधार पर किया जाए, ताकि धनराशि अनावश्यक रूप से प्राविधानित न रहे और उसका बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने सभी विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे फील्ड में जाकर विकास कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा करें और जहां कार्यों की गति धीमी है, वहां तत्काल सुधार कराएं। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष की शेष अवधि में विभाग अपने निर्धारित लक्ष्यों को समय से पूरा करें। विकास और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी, लेकिन उपलब्ध बजट का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

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