अयोध्या में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन काशी के विद्वानों के द्वारा पूरा किया जाना है. इस पूरे आयोजन की कमान संभालने वाले पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित ने स्पष्ट कर दिया है कि यह पूरा आयोजन 17 जनवरी से शुरू होगा. इसके पहले 16 जनवरी को भी पूजा पाठ का एक अनुष्ठान संपन्न किया जाएगा.

 उसके बाद अलग-अलग दिन यह कार्यक्रम होंगे. इसे लेकर काशी में विद्वानों की टीम भी अब तैयार होने लगी है. वाराणसी से लगभग 40 से ज्यादा विद्वान अकेले इस अनुष्ठान को पूरा करने के लिए रवाना होंगे, जबकि देश के अलग-अलग हिस्सों से भी सभी वेद और अन्य धार्मिक कृतियों के जानकार भी इस अनुष्ठान को पूरा करने के लिए पहुंचेंगे. 

लगभग 108 से ज्यादा विद्वानों की देखरेख में यह पूरा आयोजन संपन्न होगा, जिसकी कमान वाराणसी के पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित संभालेंगे. 

पांच दिन तक चलेगा अनुष्ठान : पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित ने बताया कि 'कहां से कितने विद्वान आएंगे इस पर भी चर्चा हो रही है और योजना बनाई जा रही है. यह अनुष्ठान पांच दिन तक चलेगा, जिसमें जो भी संस्कार भगवान की मूर्ति स्थापना के लिए हैं वह सभी पूर्ण किए जाएंगे. 

जैसे जलाधिवास, अन्नाधिवास, सैयाधिवास, पुष्पाधिवास, यह सब प्रक्रियाएं उन चार दिनों में परिपूर्ण की जाएंगी.' पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित ने बताया कि '17 जनवरी को जल यात्रा फिर तीर्थ और कलश पूजन के साथ ही अनुष्ठान की श्रृंखला शुरू हो जाएगी. इसके बाद कलश यात्रा निकाली जाएगी. 

अभिषेक का मुख्य अनुष्ठान 18 जनवरी को दोपहर में प्रधान संकल्प और गणेश अंबिका पूजन के साथ शुरू होगा, जबकि मंडप प्रवेश और पूजन उसी दिन अन्य अनुष्ठानों के साथ पूरा किया जाएगा. 19 जनवरी को अनुष्ठान के लिए पूजन पाठ को आगे बढ़ाया जाएगा. 

देवता पूजन और वेदों की अन्य शाखाओं का पाठ अधिवासन कुंड पूजन हवन के लिए प्राकृतिक विधि से आग जलाना और जलाधिवास के अलावा अन्य अनुष्ठान 19 तारीख को ही संपन्न किया जाएगा.

'जल से स्नान करने की रस्म की जाएगी पूरी : उन्होंने बताया कि '20 जनवरी को मंदिर के प्रांगण को 81 कलशों से भरे औषधीय गुणों वाले जल से शुद्ध करने और अलग-अलग नदियों के जल से इसे साफ करने के बाद, मंदिर में वास्तु पूजन संपन्न होगा, जबकि 21 जनवरी को महापूजा और नगर भ्रमण जिसमें भगवान रामलला की मूर्ति को शहर में भ्रमण के लिए निकाला जाएगा.

इस दौरान मूर्ति को पहले विभिन्न तीर्थ स्थलों और 114 कलशों से भरे पवित्र नदियों के जल से स्नान करने की रस्म पूरी की जाएगी. इन सभी अनुष्ठानों के बाद मूर्ति को सैया अधिवास अनुष्ठान के तहत यज्ञ मंडप में लाया जाएगा. 22 जनवरी की दोपहर को मुख्य प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न होगा.

 इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस पूजन में शामिल होंगे. सुबह 8:00 से दोपहर 12:00 के बीच नियमित अनुष्ठान करने के बाद मूर्ति को स्थापना स्थल पर ले जाया जाएगा और अभिषेक महापूजन के बाद आरती और पूर्णाहुति होगी.'

परिवार 10 पीढ़ियों से अधिक समय से वाराणसी में : पंडित लक्ष्मीकांत दीक्षित के बेटे सुनील दीक्षित का कहना है कि 'उनके पिता हिंदू ग्रंथों के जानकार हैं. यज्ञ अभिषेक और अन्य अनुष्ठान मेरे पिता के द्वारा संपन्न करवाया जाता है. परिवार 10 पीढ़ियों से अधिक समय से वाराणसी में है और परिवार की मुख्य जड़ें महाराष्ट्र से जुड़ी हैं. 

सुनील ने बताया कि 'सितंबर के महीने में ही कांची कम कोटी के शंकराचार्य ने पिताजी का नाम मुख्य अनुष्ठान के लिए फाइनल कर दिया था. 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर के अभिषेक में पुजारियों की सभा का नेतृत्व करने के लिए वाराणसी के 86 वर्षीय वैदिक विद्वान का चयन भारत में एक और महत्वपूर्ण इतिहास से जुड़ा हुआ है.

इतिहास लगभग 350 साल पुराना है. 1674 में छत्रपति शिवाजी का राज्याभिषेक इसी परिवार के लोगों ने सम्पन्न कराया था. सुनील बताते हैं कि वैदिक कर्मकांड (अनुष्ठानों) की सदियों पुरानी परंपराओं के विशेषज्ञ पिता पंडित लक्ष्मीकांत मथुरा-नाथ दीक्षित व उनकी वंशावली 17वीं सदी के प्रसिद्ध काशी विद्वान गागा भट्ट से जुड़ी हैं, जिन्होंने हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक-प्रमुख के रूप में शिवाजी के राज्यारोहण की अध्यक्षता की थी.'