
रूस और यूरोपीय संघ (EU) के बीच तनाव एक बार फिर तेज़ हो गया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने EU को सख्त अल्टीमेटम देते हुए साफ कहा है कि रूस की संपत्तियों को जब्त करना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है और यह “खुली डकैती” के समान है। पुतिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब यूक्रेन युद्ध के चलते यूरोपीय देशों में जमी रूसी संपत्तियों को जब्त कर यूक्रेन की मदद में इस्तेमाल करने पर चर्चा तेज़ हो गई है। रूस का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी देश की संपत्ति को इस तरह जब्त करना गैरकानूनी है और इससे वैश्विक वित्तीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
पुतिन ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर EU ने रूसी संपत्तियों को जब्त करने का कदम उठाया, तो उसका जवाब भी उतना ही कड़ा होगा। उन्होंने इशारा किया कि रूस के पास भी ऐसे आर्थिक और कानूनी विकल्प मौजूद हैं, जिनसे वह पश्चिमी देशों को नुकसान पहुंचा सकता है। पुतिन के मुताबिक, यह मामला सिर्फ रूस का नहीं है, बल्कि उन सभी देशों के लिए एक खतरनाक मिसाल बनेगा जिनकी संपत्तियां विदेशी बैंकों और संस्थानों में जमा हैं। यदि आज रूस की संपत्ति जब्त की जाती है, तो कल किसी और देश की बारी आ सकती है।
इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का यह अल्टीमेटम EU पर दबाव बनाने की रणनीति है, ताकि वह रूसी संपत्तियों को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने से पहले दो बार सोचे। वहीं EU का तर्क है कि यूक्रेन युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराना जरूरी है। ऐसे में आने वाले समय में यह विवाद और गहराने की आशंका है। साफ है कि रूस-EU संबंध अब सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक टकराव के नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।



