पंजाब

फिरोजपुर के विधायकों ने शहीदी दिवस पर शहीद करतार सिंह सराभा को दी श्रद्धांजलि

फिरोजपुर शहरी के विधायक रणबीर सिंह भुल्लर, ग्रामीण के विधायक रजनीश दहिया, गुरुहरसहाय के विधायक फौजा सिंह सरारी और डिप्टी कमिश्नर राजेश धीमान ने 19 साल की छोटी उम्र में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद करतार सिंह सराभा को आयोजित एक समारोह में पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

विधायकों ने कहा कि शहीद करतार सिंह सराभा ने एक अमीर परिवार में जन्म लेने के बावजूद 19 साल की उम्र में देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दिया। क्योंकि उनके मन में देश को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद कराने की चाहत थी।

उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों के इतिहास पर नजर डालें, तो सबसे बड़ा योगदान पंजाबियों का है, क्योंकि पंजाबी हमेशा जुल्म के खिलाफ खड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को भी इन शहीदों से प्रेरणा लेकर नेक एवं कल्याणकारी कार्य करने के लिए आगे आना चाहिए।

देश की आजादी के लिए लड़े सराभा

फिरोजपुर ग्रामीण के विधायक रजनीश दहिया ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि शहीद करतार सिंह सराभा द्वारा देश की आजादी के लिए दिया गया बलिदान आजादी के 75 साल बाद भी याद किया जाता है। क्योंकि इतनी कम उम्र में जब हम आराम की ओर भागते हैं, जबकि वे देश की आजादी के लिए लड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि शहीदों के बलिदान का कोई मोल नहीं है, उनकी शहादत अमिट है। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास शहीद सरदार करतार सिंह सराभा के नाम पर एक क्लब या सोसायटी बनाने का होगा। ताकि शहीदों के जन्म या शहादत दिवस पर कार्यक्रम आयोजित कर युवा पीढ़ी को उनके बलिदान के महत्व से अवगत कराया जा सके।

इस दौरान विधायक भुल्लर ने डिप्टी कमिश्नर से जिला लाइब्रेरी का नाम शहीद करतार सिंह सराभा के नाम पर रखने की मांग की।

लोगों के लिए मार्गदर्शक हैं सराभा

सरारी विधायक ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि शहीद सराभा कई लोगों के लिए मार्गदर्शक बने। क्योंकि उनके बाद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव सहित कई अन्य योद्धाओं ने देश को आजाद कराने के लिए जमकर संघर्ष किया और देश के लिए अपनी कुर्बानियां दीं और उनके बलिदानों के कारण हम आज की आजादी का आनंद ले रहे हैं।

उपायुक्त राजेश धीमान ने अपने संबोधन में कहा कि शहीद करतार सिंह सराभा द्वारा देश के लिए दिए गए बलिदान को हम कभी नहीं भूल सकते। उन्होंने कहा कि हम अपने उन शहीदों को हृदय से नमन करते हैं। जिनकी खातिर हम अपने देश की आजादी का स्वाद चख रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें चाहिए कि हमारे बच्चे और युवा पीढ़ी भी अपने शहीदों के बलिदान के बारे में जाने, जिसके लिए आज इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।

19 साल की उम्र में शहीद हुए थे सराभा

इस अवसर पर डॉ.रामेश्वर ने शहीद करतार सिंह सराभा की जीवनी पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 24 मई 1896 को लुधियाना जिले के गांव सराभा में एक धनाढ्य परिवार था। मंगल सिंह और बीबी साहिब कौर के घर जन्मे शहीद करतार सिंह सराभा ने 16 नवंबर 1915 को साढ़े 19 साल की उम्र में देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दे दिया।

इस अवसर पर राजकीय माध्यमिक विद्यालय की छात्रा नीलम ने शहीद करतार सिंह सराभा की जीवनी, देव समाज मॉडल स्कूल के छात्रों ने वीर सराभा नाटक प्रस्तुत किया तथा छात्रा नवजोत कौर ने गीत के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को विधायक व डीसी ने सम्मानित किया। रेड क्रॉस सचिव अशोक बहल ने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सभी को धन्यवाद दिया।

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