प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अफ्रीका दौरे के दौरान नामीबिया की संसद को संबोधित किया और लोकतंत्र, संविधान और भारत-अफ्रीका संबंधों पर खुलकर बात की। अपने भावनात्मक और प्रेरणादायक भाषण में उन्होंने कहा, “जिनके पास कुछ नहीं है, उनके पास संविधान की गारंटी होती है।” यह बयान न केवल भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की झलक देता है, बल्कि वैश्विक न्याय और समानता के सिद्धांत को भी उजागर करता है।
पीएम मोदी ने अपने भाषण में भारत और नामीबिया के ऐतिहासिक रिश्तों का ज़िक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों ने उपनिवेशवाद से मुक्ति और स्वतंत्रता की समान लड़ाई लड़ी है। उन्होंने लोकतंत्र की ताकत, समावेशी विकास और सामाजिक न्याय को भारत की नीतियों की आधारशिला बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में यह सिद्ध किया है कि संविधान केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि आम जनता की आशा और अधिकारों की सुरक्षा है। पीएम मोदी ने भारत के डिजिटल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवा सशक्तिकरण के उदाहरण देते हुए नामीबिया को साझेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव भी दिया।
भारत-अफ्रीका संबंधों की मजबूती पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में भारत और अफ्रीकी देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत, अफ्रीका को एक भागीदार के रूप में देखता है, न कि बाजार के रूप में। पीएम मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि भारत और नामीबिया समान विकास की आकांक्षाएं रखते हैं और इसी साझी सोच के साथ दोनों देश आगे बढ़ सकते हैं।
संविधान को बताया “सबसे बड़ा हथियार”
अपने भाषण में मोदी ने यह भी कहा कि भारत का संविधान उन करोड़ों लोगों की उम्मीदों की नींव है जो वंचित, शोषित और गरीब हैं। उन्होंने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र की असली ताकत तब दिखाई देती है जब हर नागरिक, चाहे वह किसी भी वर्ग या पृष्ठभूमि से हो, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो और उन्हें पाने में सक्षम हो। संविधान ही वह “सुरक्षा कवच” है जो लोगों को बराबरी का अधिकार देता है।
युवा और शिक्षा पर विशेष ध्यान
पीएम मोदी ने अपने भाषण में युवा शक्ति और शिक्षा पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में करोड़ों युवा डिजिटल क्रांति के ज़रिए नए भारत का निर्माण कर रहे हैं और यही परिवर्तन नामीबिया के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। उन्होंने शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग की इच्छा जाहिर की।
नारी सशक्तिकरण और समावेशी विकास की बात
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत में नारी सशक्तिकरण पर विशेष ज़ोर दिया गया है और महिलाओं की भागीदारी सामाजिक एवं आर्थिक फैसलों में निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने इसे भारत के समावेशी विकास मॉडल का अहम हिस्सा बताया और कहा कि भारत इस अनुभव को अन्य विकासशील देशों के साथ साझा करने के लिए तैयार है।
संयुक्त भविष्य की अपील
अपने भाषण के अंत में पीएम मोदी ने कहा कि भारत और नामीबिया जैसे देश जब मिलकर काम करेंगे तो वे न केवल अपने नागरिकों की भलाई सुनिश्चित कर पाएंगे, बल्कि दुनिया को यह संदेश भी देंगे कि सहयोग, सम्मान और लोकतंत्र से ही सशक्त भविष्य की नींव रखी जा सकती है।



