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बलरामपुर या आगरा गिरोह का मकसद सिर्फ धर्मांतरण… लव जिहाद के नाम पर आर्थिक कमजोर और किशोरियों को बनाते थे निशान

लखनऊ: बलरामपुर हो या आगरा हर जगह धर्मांतरण गिरोह का नेटवर्क फैला हुआ है। अभी बलरामपुर के जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के गिरोह का खुलासा हुआ ही था। जांच भी पूरी नहीं हो पाई न ही आरोपियों की गिरफ्तारी। इसी बीच आगरा कमिश्नरेट पुलिस ने एक और बड़े गिरोह का खुलासा किया। इस गिरोह के दस सदस्यों को छह राज्यों से गिरफ्तार किया। दोनों गिरोहों में कई समानता है। इन गिरोहों का सच समाने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।

यूपी एटीएस जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के गिरोह के सात लोगों को अब तक गिरफ्तार किया है। पहले छांगुर, उसकी करीबी नीतू उर्फ नसरीन समेत चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसके बाद रशीद शाह उर्फ गाजी को गुरुवार देर रात और शनिवार को शहाबुद्दीन और सोहराब शाह को गिरफ्तार किया। सोहराब छांगुर का भतीजा है। अब तक हुई जांच में सामने आया कि छांगुर बाबा का गिरोह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के संपर्क में था। वहीं, गिरोह को प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और अन्य संगठनों से तार जुड़े थे। इस गैंग को दुबई, लंदन और अन्य देशों से भारी फंडिंग मिल रही थी। अब तक 100 करोड़ से ज्यादा फंडिंग के दस्तावेज मिल चुके हैं।

आगरा गिरोह का विदेशी कनेक्शन, छह राज्यों में नेटवर्क

शनिवार को आगरा कमिश्नरेट पुलिस ने 33 व 18 वर्ष की दो सगी बहनों की गुमशुदगी के बाद उनकी तलाश के दौरान एक नये गिरोह का खुलासा किया। यह गिरोह बडे़ पैमाने पर धर्मांतरण का काम कर रहा है। पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि छांगुर बाबा की तरह ही यह गिरोह भी काम करता है। गिरोह नाबालिग, आर्थिक कमजोर युवतियों को निशाना बनाता है। उनको लालच देकर धर्मांतरण कराता है। इस गिरोह का नेटवर्क उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और गोवा जैसे छह राज्यों में सक्रिय है।

दोनों गिरोह की समानताएं

छांगुर बाबा गिरोह और आगरा धर्मांतरण गिरोह के बीच सीधा कनेक्शन भले ही न हो लेकिन सच तो यह है कि दोनों के काम करने का तरीका और मकसद एक ही है। इसमें काफी कुछ समाजन है। जिसके कारण सुरक्षा एजेंसियों के माथे पर परेशानी की लकीरें गहरी होती जा रही हैं। पुलिस के मुताबिक दोनों गिरोह को विदेशों से फंडिंग की जा रही थी। छांगुर बाबा गिरोह को दुबई, लंदन से तो आगरा गिरोह को कनाडा और अमेरिका से रुपये आ रहे थे। इसका प्रयोग धर्मांतरण व कट्टरता फैलाने का काम कर रहे थे। दोनों गिरोह आर्थिक कमजोर वर्गों खासकर नाबालिग और गरीब लड़कियों को निशाना बनाते थे। प्रेम में फंसाकर, लालच और दबाव के जरिए कथित तौर पर धर्म परिवर्तन करवाया जाता था। आगरा वाले गैंग में तो सेफ हाउस, नए फोन और सिम देने जैसी रणनीतियां भी सामने आई हैं।

संगठित और बड़ा नेटवर्क

दोनों गिरोह का नेटवर्क देश के कई राज्यों के अलावा विदेशों में तक फैला हुआ है। छांगुर बाबा गिरोह के तार पाकिस्तान और पीएफआई से जुड़ा है। इसकी पुष्टि डीजीपी राजीव कृष्ण ने की। वहीं आगरा के गिरोह का तार भी इन संगठनों से जुड़ने की बात सामने आई है। दोनों योजनाबद्ध तरीके से अपना काम कर रहे थे। दोनों गिरोह विधि विरूद्ध धर्मांतरण करवा रहे थे। साथ ही कट्टरता को बढ़ावा दे रहे थे। आगरा गिरोह के कार्यशैली पर पुलिस को आईएसआईएस की जिरॉक्स नजर आई। वहीं, छांगुर गिरोह का भी आतंकी संगठनों से कनेक्शन के दावे पुलिस ने किये हैं।

जम्मू-कश्मीर की युवती ने किया था ब्रेनवॉश आगरा पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार के मुताबिक दोनों बहनों के लापता होने की जांच शुरू की गई। इसमें सामने आया कि बड़ी बहन की दोस्ती जम्मू-कश्मीर की रहने वाली साइमा नाम की युवती से थी। साइमा ने बड़ी बहन का ब्रेनवॉश किया। साइमा ने बड़ी बहन को इस्लाम की अच्छाई के बारे में जानकारी देते हुए अपनाने का दबाव बनाया। जब बड़ी बहन वापस आई तो उसने छोटी बहन को भी उसी रास्ते पर डाल दिया। पुलिस की जांच में पुष्टि हुई की दोनों बहनें धर्मांतरण गिरोह से जुड़ गई थी।

दस दिन की मिली कस्टडी रिमांड

पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार के मुताबिक शनिवार को धर्मांतरण गिरोह के सभी दस आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। जहां पुलिस ने गिरोह के नेटवर्क, विदेशी फंडिंग, विदेशों में कहां कनेक्शन, कौन स्थानीय स्तर पर सहयोग करता, गिरोह ने कितनी किशोरियों और युवतियों के धर्मांतरण कराये, जैसे सवालों के जवाब तलाशने के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड की अर्जी डाली। इस पर कोर्ट ने दस दिन की कस्टडी रिमांड मंजूर कर लिया। रविवार को रिमांड का पहला दिन है। आरोपियों से एटीएस, एसटीएफ, एनआईए समेत देश की कई सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ करने आगरा पहुंच सकती हैं।

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