Hariyali Teej 2025: जानें तारीख, पूजा विधि और महत्व
हरियाली तीज, भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख और पारंपरिक पर्व है, जिसे विशेष रूप से उत्तर भारत—राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और मध्य प्रदेश—में बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। यह पर्व सावन मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है और वर्ष 2025 में यह 1 अगस्त (शुक्रवार) को पड़ रही है। यह तीज व्रत मुख्य रूप से विवाहित स्त्रियों द्वारा अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है, लेकिन कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर की प्राप्ति हेतु इस दिन व्रत करती हैं।
हरियाली तीज के दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, हरे वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेहंदी लगाती हैं और झूला झूलती हैं—जो इस पर्व की विशेषता है। यह पर्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि प्रकृति प्रेम का भी प्रतीक है, क्योंकि सावन में चारों ओर हरियाली छा जाती है, और यही इस तीज को “हरियाली तीज” नाम देता है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए 108 बार जन्म लिया था, और हरियाली तीज के दिन ही उनका पुनर्मिलन हुआ था। इसलिए इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। व्रती महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को कथा सुनकर पूजा संपन्न करती हैं।
इस पर्व का सामाजिक और भावनात्मक पक्ष भी बहुत गहरा है। महिलाएं मिल-जुलकर गाती-बजाती हैं, लोकगीतों में अपने मन की भावनाएं प्रकट करती हैं, जिससे सामाजिक एकता और पारिवारिक प्रेम को बढ़ावा मिलता है।
संक्षेप में, हरियाली तीज केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, यह स्त्री शक्ति, प्रेम, प्रकृति और संस्कृति का उत्सव भी है, जो हर वर्ष सावन में नवचेतना और सौंदर्य की अनुभूति कराता है। यदि आप इस पर्व की सच्ची भावना से पूजा करते हैं, तो यह आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।



