Menopause के बाद कैसे रखें दिल की सेहत? जानिए डॉक्टर की सलाह
मेनोपॉज यानी महिलाओं के जीवन में एक ऐसा मोड़ जब पीरियड्स हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं। यह आमतौर पर 45 से 55 की उम्र के बीच होता है और इसके साथ कई शारीरिक और मानसिक बदलाव आते हैं। लेकिन एक बहुत महत्वपूर्ण बात जो अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, वह है — दिल की सेहत पर इसका प्रभाव। डॉक्टरों के अनुसार, मेनोपॉज के बाद महिलाओं में हार्ट डिजीज का खतरा दोगुना तक बढ़ जाता है। इसका कारण है एस्ट्रोजन हार्मोन का गिरता स्तर, जो पहले तक दिल को एक तरह की सुरक्षा देता था।
एस्ट्रोजन शरीर में कोलेस्ट्रॉल के बैलेंस को बनाए रखने, धमनियों को लचीला रखने और रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है। मेनोपॉज के बाद जब इसका स्तर गिरता है, तो शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है, ब्लड प्रेशर अनियंत्रित हो सकता है और धमनियां कठोर हो सकती हैं। यही सब मिलकर दिल की बीमारियों की आशंका को बढ़ा देते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि महिलाएं यदि इस दौर में अपने जीवनशैली में कुछ 7 अहम बदलाव करें, तो दिल को काफी हद तक स्वस्थ रखा जा सकता है:
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नियमित व्यायाम करें – रोजाना 30 मिनट वॉक, योग या कार्डियो।
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संतुलित आहार लें – ओमेगा-3 फैटी एसिड, फल-सब्जियां, साबुत अनाज का सेवन करें।
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धूम्रपान और शराब से दूर रहें – यह दिल पर सीधा असर डालते हैं।
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तनाव कम करें – मेडिटेशन और पर्याप्त नींद से तनाव को नियंत्रित करें।
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ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं।
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हॉर्मोनल थैरेपी पर डॉक्टर से सलाह लें – हर महिला के लिए सही नहीं होती।
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वजन को संतुलित रखें – मोटापा दिल की सबसे बड़ी दुश्मन है।
इसलिए जरूरी है कि मेनोपॉज को उम्र का अंत नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की नई शुरुआत माना जाए। इस समय दिल की सेहत पर विशेष ध्यान देना न सिर्फ हार्ट अटैक जैसी बीमारियों से बचा सकता है, बल्कि आगे की जिंदगी को बेहतर और ऊर्जावान बना सकता है।



