इजरायल और हमास के बीच जारी लंबे युद्ध ने अब तक 60,000 से अधिक फलस्तीनी नागरिकों की जान ले ली है, जिससे गाजा पट्टी में एक भीषण मानवीय संकट पैदा हो गया है। संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस स्थिति को “आधुनिक युग की सबसे भयावह त्रासदियों” में से एक बताया है। बमबारी, घेराबंदी, और संसाधनों की कमी ने गाजा को लगभग पूरी तरह से तबाह कर दिया है।
इस युद्ध की शुरुआत अक्टूबर 2023 में हुई थी, जब हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमलों के जवाब में इजरायल ने गाजा में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की। शुरुआत में यह संघर्ष केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित था, लेकिन समय के साथ यह आम नागरिकों की ज़िंदगी को भी निगल गया। स्कूल, अस्पताल, पानी की टंकियां और बिजलीघर जैसे बुनियादी ढांचे ध्वस्त हो चुके हैं।
गंभीर खाद्य संकट और अकाल की स्थिति बन चुकी है। गाजा में रहने वाले लाखों लोगों को अब पीने का पानी तक नहीं मिल रहा। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मानवीय सहायता नहीं पहुँची, तो गाजा में हजारों लोग भुखमरी से मर सकते हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और अन्य संगठनों ने रिपोर्ट दी है कि गाजा में 80% से अधिक परिवारों को प्रतिदिन एक वक्त का भोजन भी नसीब नहीं हो रहा।
इजरायल का कहना है कि वह हमास के ठिकानों को निशाना बना रहा है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि मारे गए लोगों में बड़ी संख्या महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की है। अस्पतालों में दवाओं की भारी कमी है और कई बार घायलों का इलाज खुले मैदानों में करना पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस युद्ध की कड़ी आलोचना हो रही है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव, पोप फ्रांसिस, और कई यूरोपीय देशों ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है। भारत समेत कई देशों ने मानवीय सहायता भेजी है, लेकिन सीमित पहुँच और सुरक्षा कारणों से राहत कार्य प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं।
यह संघर्ष न केवल एक राजनीतिक या सैन्य टकराव है, बल्कि यह अब एक मानवीय त्रासदी बन चुका है। जब तक दोनों पक्ष बातचीत और समाधान का रास्ता नहीं अपनाते, तब तक गाजा की आम जनता इसकी सबसे बड़ी कीमत चुकाती रहेगी। आने वाले हफ्ते बेहद निर्णायक होंगे — क्या युद्ध थमेगा, या अकाल और तबाही की यह कहानी और लंबी चलेगी?



