उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध की दुनिया से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। माफिया डॉन और पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के छोटे बेटे को गाजीपुर पुलिस ने लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी लखनऊ स्थित विधायक अब्बास अंसारी के सरकारी आवास से की गई, जो मुख्तार अंसारी का बड़ा बेटा और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) का विधायक है।
गिरफ्तारी की यह कार्रवाई पुलिस के लिए एक सामरिक उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि मुख्तार अंसारी परिवार के खिलाफ लंबे समय से कार्रवाई चल रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मुख्तार अंसारी के छोटे बेटे के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज था और वह लंबे समय से फरार चल रहा था। कई बार समन और नोटिस भेजे जाने के बाद भी वह पेश नहीं हुआ, जिसके बाद गैर-जमानती वारंट जारी हुआ और अंततः गिरफ्तारी की गई।
गाजीपुर पुलिस की एक विशेष टीम ने लखनऊ में छापेमारी की और उसे अब्बास अंसारी के विधायक आवास से हिरासत में लिया। यह आवास लखनऊ के वीआईपी इलाके में स्थित है, जहां आम तौर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं। लेकिन पुलिस ने गोपनीयता बरतते हुए त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया और तुरंत गाजीपुर रवाना कर दिया गया।
यह गिरफ्तारी न केवल कानून व्यवस्था को लेकर सरकार की सख्ती को दर्शाती है, बल्कि यह भी साफ करता है कि योगी सरकार अपराध और राजनीति के गठजोड़ पर लगातार चोट कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही कई मौकों पर यह कह चुके हैं कि राज्य में किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका रसूख कितना भी बड़ा क्यों न हो।
मुख्तार अंसारी और उसका परिवार पहले से ही कई आपराधिक मामलों में लिप्त रहा है। मुख्तार खुद गैंगस्टर एक्ट, मर्डर, अपहरण, रंगदारी जैसे मामलों में सजायाफ्ता है। अब्बास अंसारी के खिलाफ भी शस्त्र लाइसेंस घोटाले, जेल नियमों के उल्लंघन और सरकारी तंत्र के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप हैं।
इस घटनाक्रम से यह भी सवाल उठता है कि एक विधायक आवास, जो कि राज्य की राजधानी में स्थित है, वहां एक फरार आरोपी कैसे छिपा हुआ था? क्या इसके पीछे राजनीतिक संरक्षण था या यह सुरक्षा व्यवस्था की चूक? इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद सामने आ सकते हैं, लेकिन यह मामला निश्चित तौर पर सत्ता, अपराध और प्रशासन के जटिल संबंधों की ओर इशारा करता है।
गिरफ्तारी के बाद अंसारी परिवार पर कानून का शिकंजा और कसने की संभावना है। पुलिस और जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुट गई हैं कि मुख्तार अंसारी का छोटा बेटा लखनऊ में कब से रह रहा था, किन-किन लोगों से उसका संपर्क था और क्या इस दौरान उसे किसी से प्रशासनिक या राजनीतिक मदद मिल रही थी।



