
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। इजरायल और गाजा के बीच लंबे समय से चल रहे संघर्ष के बीच अब इजरायल की ओर से एक बड़ा संकेत आया है। खबर है कि इजरायली सेना अब गाजा पट्टी पर पूर्ण कब्जे के पक्ष में है। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई।
नेतन्याहू ने हाल ही में सेना के जनरलों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और इंटेलिजेंस एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बैठक की, जहां गाजा स्ट्रिप पर स्थायी नियंत्रण को लेकर विभिन्न रणनीतियों पर मंथन हुआ। इस बैठक में सैन्य अधिकारियों ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि क्षेत्र में स्थायी शांति चाहिए, तो गाजा पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण आवश्यक है।
इजरायल सरकार का मानना है कि जब तक हमास जैसे आतंकी संगठन गाजा में सक्रिय रहेंगे, तब तक इजरायली नागरिकों की सुरक्षा खतरे में रहेगी। इसलिए गाजा को पूरी तरह से डिमिलिट्राइज़ कर वहां एक स्थायी इजरायली उपस्थिति सुनिश्चित करना अब सेना की प्राथमिकता बन चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, सेना का यह भी मानना है कि गाजा पर नियंत्रण से क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ेगी और सीमा से लगातार हो रहे रॉकेट हमलों और घुसपैठ को पूरी तरह रोका जा सकेगा। हालांकि, इस कदम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध के स्वर भी उठने की संभावना है, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र, अरब देशों और यूरोपीय संघ की ओर से।
वहीं, फिलिस्तीनी प्राधिकरण और हमास ने इजरायल की इस मंशा को “अतिक्रमण और युद्ध अपराध” करार देते हुए इसका विरोध किया है। हमास की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि यदि इजरायल गाजा पर पूरी तरह कब्जा करता है, तो वे इससे भी बड़ा प्रतिरोध करेंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि इजरायल गाजा पर स्थायी कब्जे की ओर बढ़ता है, तो यह कदम पूरे मध्य पूर्व में एक नया संकट पैदा कर सकता है। इससे न केवल फिलिस्तीनी क्षेत्रों में अस्थिरता बढ़ेगी, बल्कि ईरान, लेबनान और अन्य अरब देशों की प्रतिक्रियाएं भी भड़क सकती हैं।
इजरायल की जनता भी इस मुद्दे पर बंटी हुई नजर आ रही है। एक वर्ग गाजा पर नियंत्रण को सुरक्षा के लिहाज से जरूरी मानता है, जबकि दूसरा वर्ग इसे एक लंबे और महंगे युद्ध की शुरुआत कह रहा है, जिसमें नागरिकों की जान और संसाधनों की भारी क्षति होगी।
फिलहाल नेतन्याहू सरकार इस मुद्दे पर निर्णय लेने से पहले सभी संभावित परिणामों का मूल्यांकन कर रही है। लेकिन इतना स्पष्ट है कि गाजा को लेकर इजरायल का रुख अब पहले से कहीं अधिक आक्रामक और निर्णायक होता जा रहा है।



