
बांग्लादेश की राजनीति में एक अहम मोड़ तब आया जब नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस ने आगामी आम चुनाव की तारीख की घोषणा कर दी। उनके अनुसार, देश में अगले आम चुनाव फरवरी 2026 में कराए जाएंगे। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब देश में राजनीतिक तनाव, विपक्षी आंदोलनों और शासन व्यवस्था को लेकर बहस अपने चरम पर है।
मोहम्मद यूनुस, जो अब तक मुख्यतः सामाजिक उद्यमों और गरीबी उन्मूलन के कार्यों के लिए पहचाने जाते रहे हैं, हाल के वर्षों में राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि आगामी चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराए जाएंगे और इसके लिए चुनाव आयोग को पूरी आज़ादी दी जाएगी। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि किसी भी प्रकार की राजनीतिक बाधा या सत्ता पक्ष का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह घोषणा राजधानी ढाका में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई, जहां यूनुस ने देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए समयबद्ध चुनाव आवश्यक हैं और बांग्लादेश की जनता को अब बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से खास अपील करते हुए कहा कि वे अधिक से अधिक संख्या में मतदान करें और देश की दिशा तय करने में भागीदारी निभाएं।
वर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार पर विपक्ष लंबे समय से आरोप लगाता आ रहा है कि वह चुनावों में हेराफेरी करती है और लोकतांत्रिक संस्थाओं को दबाव में रखती है। यूनुस की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दलों ने सड़कों पर उतर कर सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूनुस की यह पहल बांग्लादेश की राजनीति में एक नया विकल्प उभरने की संभावना को दर्शाती है। यदि वे खुद या उनके समर्थित गठबंधन चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो यह शेख हसीना की आवामी लीग और खालिदा जिया की बीएनपी के पारंपरिक दोध्रुवीय समीकरण को तोड़ सकता है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यूनुस खुद चुनाव लड़ेंगे या नहीं, लेकिन उनकी सक्रियता और चुनावी प्रक्रिया में दखल देना इस बात का संकेत है कि वे बांग्लादेश की राजनीति को सुधार और पारदर्शिता की दिशा में ले जाना चाहते हैं।
बांग्लादेश की जनता अब चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार कर रही है। फरवरी 2026 में होने वाले ये चुनाव न केवल देश की अगली सरकार तय करेंगे, बल्कि यह भी स्पष्ट करेंगे कि क्या बांग्लादेश एक मजबूत लोकतंत्र की ओर बढ़ रहा है या फिर वही पुरानी राजनीतिक रस्साकशी जारी रहेगी।



