72 मिनट की बल्लेबाज़ी और ‘0’ पर आउट! फिर भी मिला स्टैंडिंग ओवेशन – जानिए क्रिकेट इतिहास की ये अनोखी पारी

क्रिकेट के इतिहास में कई यादगार पारियाँ खेली गई हैं – किसी ने तिहरा शतक जड़ा, तो किसी ने अकेले दम पर मैच जिताया। लेकिन कुछ पारियाँ सिर्फ रन के आधार पर नहीं, बल्कि जज़्बे, संघर्ष और समर्पण के लिए याद रखी जाती हैं। ऐसी ही एक पारी है, जिसमें बल्लेबाज़ ने पूरे 72 मिनट तक बैटिंग की, 63 गेंदें खेलीं, लेकिन स्कोर था – ‘0’ रन। जी हां, ज़ीरो पर आउट होने के बावजूद दर्शकों ने खड़े होकर ताली बजाई और इसे क्रिकेट इतिहास की सबसे खास पारियों में गिना गया।
ये कहानी है ज्योफ्री बॉयकॉट जैसे धैर्यवान बल्लेबाज़ की नहीं, बल्कि इंग्लैंड के खिलाड़ी क्रिस टावरे (Chris Tavaré) की, जिन्होंने 1981 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच में यह पारी खेली थी। लेकिन दरअसल, सबसे प्रसिद्ध “0 पर 72 मिनट” वाली पारी भारत के महान बल्लेबाज़ चंद्रकांत पांडित या फिर न्यूजीलैंड के जॉन मोरिसन जैसी खिलाड़ियों से नहीं, बल्कि न्यूजीलैंड के जियोफ एलॉट (Geoff Allott) की मानी जाती है।
ये ऐतिहासिक पारी 1999 वर्ल्ड कप में खेली गई थी। जियोफ एलॉट न्यूजीलैंड के एक टेलएंडर गेंदबाज़ थे, लेकिन जब टीम संकट में थी, तब उन्होंने मोर्चा संभाला। उन्होंने 77 मिनट तक क्रीज़ पर टिककर 52 गेंदें खेलीं और 0 रन बनाए। यह अब तक की सबसे लंबी duck (0 रन की पारी) मानी जाती है।
तो सवाल उठता है, जब रन ही नहीं बने तो स्टैंडिंग ओवेशन क्यों? जवाब है – परिस्थितियाँ। टीम मुश्किल में थी, विकेट गिरते जा रहे थे, और एलॉट ने सामने डटकर संघर्ष किया। उन्होंने समय बिताया, दूसरे छोर पर बल्लेबाज़ को टिकने का मौका दिया और मैच को ड्रॉ की ओर ले गए।
उनका ये साहसिक संघर्ष और आत्मविश्वास ही था, जिसके लिए दर्शकों ने उनका सम्मान किया। क्रिकेट में हमेशा रन ही सबकुछ नहीं होता, कभी-कभी संघर्ष भी ‘मैन ऑफ द मैच’ जीत लेता है।
इस अनोखी पारी ने साबित कर दिया कि क्रिकेट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि भावना, धैर्य और समर्पण की भी कहानी है।



