मिशन शक्ति अभियान: बेटियां बनेंगी एक दिन की प्रशासनिक अधिकारी, 23 से 30 सितंबर तक होंगे विशेष आयोजन

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मिशन शक्ति अभियान लगातार महिलाओं और बेटियों के सशक्तिकरण के लिए नई-नई पहल कर रहा है। इस बार इस अभियान के अंतर्गत एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसके तहत बेटियों को एक दिन के लिए प्रशासनिक अधिकारी बनने का अवसर दिया जाएगा। यह अनूठी पहल 23 से 30 सितंबर तक चलेगी, जिसमें पूरे प्रदेश में विभिन्न जागरूकता और सशक्तिकरण से जुड़े आयोजन होंगे।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य है कि बेटियों को यह एहसास हो सके कि वे भी प्रशासनिक सेवाओं में जाकर समाज में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। एक दिन की डीएम, एसपी या अन्य उच्च प्रशासनिक पदों पर बैठकर वे न केवल निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझेंगी, बल्कि आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की दिशा तय करने की प्रेरणा भी पाएंगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमेशा महिला सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता दी है। मिशन शक्ति अभियान उनकी इसी सोच का प्रतिबिंब है। इस अभियान का लक्ष्य महिलाओं और बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वे समाज के हर क्षेत्र में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा सकें।
इस आयोजन में 23 से 30 सितंबर तक विभिन्न गतिविधियाँ होंगी, जिनमें महिलाओं की सुरक्षा, शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर विशेष कार्यशालाएँ शामिल हैं। पुलिस विभाग, प्रशासनिक इकाइयाँ और शिक्षा संस्थान मिलकर इस कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देंगे। स्कूल और कॉलेज स्तर पर भी बेटियों को प्रेरित करने के लिए प्रतियोगिताएँ, निबंध लेखन, पोस्टर मेकिंग और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
एक दिन की प्रशासनिक अधिकारी बनने वाली बेटियों का चयन उनकी उपलब्धियों और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए किया जाएगा। यह पहल उन सभी छात्राओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी जो भविष्य में सिविल सेवा, प्रशासन या पुलिस विभाग में जाकर देश और समाज की सेवा करना चाहती हैं।
मिशन शक्ति के अंतर्गत चलाए जा रहे ऐसे कार्यक्रम समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं। इससे न केवल बेटियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा बल्कि परिवार और समाज भी यह समझेगा कि महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने की क्षमता रखती हैं।
समाज में जागरूकता और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए यह कदम निश्चित रूप से मील का पत्थर साबित होगा। मिशन शक्ति की इस पहल से यह संदेश जाता है कि बेटियां अब सिर्फ घर-परिवार तक सीमित नहीं, बल्कि वे प्रशासन और शासन व्यवस्था में भी अपनी छाप छोड़ सकती हैं।



