
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु एक बड़े हादसे से बाल-बाल बचीं जब उनके हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के दौरान हेलीपैड का हिस्सा अचानक धंस गया। यह घटना उस समय हुई जब राष्ट्रपति अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत राज्य के एक दौरे पर थीं। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही हेलीकॉप्टर हेलीपैड के करीब पहुंचा, नीचे का हिस्सा मिट्टी के धंसने के कारण कमजोर पड़ गया। हालांकि पायलट की सतर्कता और त्वरित निर्णय की वजह से एक बड़ी दुर्घटना टल गई।
सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति मुर्मु जिस हेलीकॉप्टर में सवार थीं, उसकी सुरक्षित लैंडिंग के बाद तकनीकी टीम ने तुरंत हेलीपैड की जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक रिपोर्ट में पाया गया है कि हेलीपैड का निर्माण हाल ही में किया गया था और बारिश के कारण जमीन के नीचे नमी बढ़ने से यह हिस्सा कमजोर हो गया था। मौके पर मौजूद स्थानीय प्रशासन और एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) ने तुरंत राष्ट्रपति को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और इलाके को सील कर दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही राज्य सरकार और केंद्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी सतर्क हो गए। सुरक्षा एजेंसियों ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वयं इस घटना पर किसी तरह की घबराहट न दिखाते हुए पूरी स्थिति को शांत मन से संभाला और कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की अनुमति दी।
यह घटना राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। देश की सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति की सुरक्षा में इस तरह की चूक चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि हेलीपैड निर्माण में मानक प्रक्रिया का सख्ती से पालन न किया गया हो सकता है। वर्तमान में, प्रशासन ने संबंधित इंजीनियरिंग टीमों से रिपोर्ट मांगी है और दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
यह राहत की बात है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सुरक्षित हैं और कोई भी जनहानि नहीं हुई। लेकिन यह घटना सुरक्षा प्रोटोकॉल की मजबूती पर एक बार फिर गंभीर चर्चा को जन्म दे रही है।



