
दुनिया के साइबर परिदृश्य में एक नई और खतरनाक कड़ी उभर कर सामने आई है — उत्तर कोरिया अब क्रिप्टो करेंसी पर बड़े पैमाने पर सेंधमारी कर अरबों रुपये बराबर की संपत्ति चुरा रहा है। हाल के सालों में उसके साथ जुड़े हैकिंग नेटवर्कों, जिनमें कुख्यात Lazarus Group शामिल है, ने केंद्रीकृत और विकेंद्रीकृत दोनों प्रकार के प्लेटफॉर्मों को निशाना बना कर बड़े हिट दर्ज किए हैं। फ़रवरी 2025 में Bybit नामक एक्सचेंज से लगभग 1.5 बिलियन डॉलर की ईथर चोरी को अमेरिकी एजेंसियों ने उत्तर कोरिया से जुड़े हमलावरों से जोड़ा — इस हमले ने वैश्विक क्रिप्टो समुदाय और सुरक्षा शोधकर्ताओं को झकझोर दिया।
इस चुनौती से निपटने के लिये देशों और क्रिप्टो उद्योग को सहयोग बढ़ाना होगा — एक्सचेंजों पर कड़े केवाईसी/एएमएल नियम, ब्लॉकचेन इंटेलिजेंस शेयरिंग, और अंतरराष्ट्रीय क़ानूनी तालमेल जरूरी है। उसी समय आम उपयोगकर्ताओं और निवेशकों को भी सख्त सुरक्षा व्यवहार अपनाने होंगे: हार्डवेयर वॉलेट, मल्टी-सिग व्यवस्था, और संशयास्पद लिंक/ऐप से सतर्कता। वरना डिजिटल संपत्तियाँ आज के अंतरराष्ट्रीय सियासी-आर्थिक तकरार में आसान निशाना बनी रहेंगी।



