
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी इस साल होने वाले ASEAN शिखर सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे। मलेशियाई प्रधानमंत्री ने हाल ही में इस बात की जानकारी दी कि पीएम मोदी इस सम्मेलन में व्यक्तिगत कारणों से नहीं जा पाएंगे। यह निर्णय कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मुद्दों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। ASEAN शिखर सम्मेलन दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। भारत भी ASEAN के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है, लेकिन इस बार पीएम मोदी की अनुपस्थिति से भारत की भागीदारी कुछ हद तक सीमित रहेगी।
मलेशियाई प्रधानमंत्री ने बताया कि पीएम मोदी ने शिखर सम्मेलन में अपनी गैर-मौजूदगी के बावजूद, भारत की ओर से उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है। इस प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति से भारत की नीतियों और विचारों को सम्मेलन में प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। भारत और ASEAN देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।
भारत और ASEAN के बीच पिछले वर्षों में कई समझौते और सहयोग योजनाएं लागू की गई हैं। इसके बावजूद, इस बार पीएम मोदी की गैर-उपस्थिति से कुछ राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चाओं में हल्की कमी महसूस की जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक शारीरिक अनुपस्थिति है, भारत की ASEAN के प्रति प्रतिबद्धता में कोई कमी नहीं आएगी। पीएम मोदी की ओर से भेजा गया प्रतिनिधिमंडल सम्मेलन में भारत की नीतियों और दृष्टिकोण को मजबूती से प्रस्तुत करेगा।
इसके अलावा, भारत ASEAN देशों के साथ समुद्री सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में भी सहयोग को आगे बढ़ाने का इच्छुक है। शिखर सम्मेलन में इन मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है। इस प्रकार, पीएम मोदी की अनुपस्थिति के बावजूद, भारत ASEAN के साथ अपने सहयोग को बनाए रखने और विस्तार करने के प्रयासों में सक्रिय रहेगा। यह कदम भारत की दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ स्थिर और सकारात्मक संबंधों को सुनिश्चित करने में मदद करेगा।



