
महाराष्ट्र के मंत्रालय में जल्द ही देशभक्ति की गूंज सुनाई देगी, जब सभी अधिकारी और कर्मचारी सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम’ का गायन करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के बाद देशभर में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रभक्ति और एकता की भावना को और अधिक सशक्त बनाना है। यह पहल ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसमें देश के हर राज्य और सरकारी कार्यालयों में ‘वंदे मातरम’ गान को नियमित कार्यक्रम के रूप में शामिल किया जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार ने पीएम मोदी के इस आह्वान का समर्थन करते हुए इसे अपने मंत्रालय में लागू करने की घोषणा की है। तय किया गया है कि हर सोमवार सुबह मंत्रालय में कार्य प्रारंभ होने से पहले अधिकारी और कर्मचारी एक साथ ‘वंदे मातरम’ गाएंगे। इस निर्णय को लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि यह केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि देश के प्रति कर्तव्य और सम्मान की अभिव्यक्ति है।
प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का प्रतीक है, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों भारतीयों को प्रेरित किया था। इस गीत के माध्यम से देशवासियों में एकता, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना जागृत होती है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी राज्यों को दिशा-निर्देश जारी कर सभी सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक संस्थानों में इस कार्यक्रम को नियमित रूप से आयोजित करने की सिफारिश की है।
राज्य के अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से सरकारी कर्मचारियों में न केवल देशभक्ति की भावना बढ़ेगी, बल्कि सामूहिक एकजुटता भी मजबूत होगी। वहीं नागरिकों ने भी इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय गौरव को सम्मान देने का एक शानदार प्रयास है।
महाराष्ट्र के मंत्रालय में सामूहिक ‘वंदे मातरम’ गान की यह परंपरा आने वाले दिनों में पूरे देश में एक उदाहरण स्थापित कर सकती है। इससे युवा पीढ़ी में भी राष्ट्रप्रेम और भारतीयता की भावना को नए सिरे से जागृत करने में मदद मिलेगी।



