National Epilepsy Day 2025: देर रात मोबाइल स्क्रीन से बढ़ सकती है मिर्गी की समस्या? जानें पूरी सच्चाई

National Epilepsy Day 2025 हर वर्ष की तरह इस बार भी लोगों में मिर्गी (Epilepsy) के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर लेकर आया है। मिर्गी एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जिसमें रोगी को बार-बार दौरे (Seizures) आते हैं। आज के समय में तकनीक और मोबाइल फोन का उपयोग हमारी दिनचर्या का बड़ा हिस्सा बन चुका है। ऐसे में एक बड़ा सवाल उठता है—क्या देर रात तक फोन चलाने की आदत मिर्गी के मरीजों के लिए खतरा बन सकती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, देर रात तक लगातार मोबाइल स्क्रीन को देखना, नींद की कमी, तेज रोशनी वाले वीडियो देखने की आदत और स्क्रीन फ्लैशेस मिर्गी के कुछ रोगियों में दौरे को ट्रिगर कर सकते हैं। खासतौर पर फोटोसेंसिटिव एपिलेप्सी (Photosensitive Epilepsy) वाले मरीजों पर चमकदार, बदलती रोशनी या तेज रंगों के पैटर्न का अधिक प्रभाव पड़ता है। कई सोशल मीडिया रील्स, गेम्स और तेज रोशनी व साउंड इफेक्ट्स वाले वीडियो अचानक से दिमाग की न्यूरोलॉजिकल गतिविधि को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे दौरे आने की संभावना बढ़ जाती है।
देर रात तक जागने से नींद पूरी न होना भी मिर्गी का एक बड़ा ट्रिगर माना गया है। जब शरीर और दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो मस्तिष्क की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी असंतुलित हो सकती है, जिससे seizure का खतरा बढ़ सकता है। यही कारण है कि मिर्गी के मरीजों को डॉक्टर हमेशा पर्याप्त नींद लेने और सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम रखने की सलाह देते हैं।
इसके अलावा, मोबाइल की ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है, जिससे नींद की गुणवत्ता खराब होती है। लंबे समय तक तनाव, चिंता और थकान भी दौरे आने की आशंका बढ़ाते हैं, और देर रात फोन स्क्रॉल करना इन सभी समस्याओं को और गहरा कर देता है।
National Epilepsy Day 2025 का उद्देश्य न सिर्फ मिर्गी के बारे में गलत धारणाओं को दूर करना है, बल्कि लोगों को यह समझाना भी है कि एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मिर्गी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे में मोबाइल फोन का उपयोग सीमित रखना, रात में तेज रोशनी से बचना, और पर्याप्त नींद लेना बेहद जरूरी है। तकनीक का इस्तेमाल जहां जरूरी है, वहीं इसकी सीमा और समय का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें मिर्गी की समस्या है।



