
बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर में है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद देशभर में जबरदस्त हंगामा खड़ा हो गया। फैसले की घोषणा के तुरंत बाद ढाका, चिटगाँव, राजशाही और अन्य प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन हिंसा में बदल गए, जिनमें अब तक 50 से ज्यादा लोग घायल होने की पुष्टि की गई है। कई स्थानों पर वाहनों में तोड़-फोड़ की गई, सड़कें जाम हो गईं और पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, शेख हसीना के समर्थकों ने फैसले को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। उनका कहना है कि यह फैसला विपक्ष के दबाव और राजनीतिक अस्थिरता का परिणाम है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों का आरोप है कि हसीना के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और शक्ति के दुरुपयोग की कई घटनाएं हुईं, जिन पर न्यायालय ने सख्त कदम उठाया है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है, जिससे देश का माहौल और तनावपूर्ण हो गया है।
हिंसा के बढ़ते दायरे ने आम नागरिकों का जीवन भी प्रभावित किया है। बाजार बंद हो गए, सार्वजनिक परिवहन बाधित हुआ और सुरक्षा बलों को कई संवेदनशील इलाकों में तैनात करना पड़ा है। स्कूलों और कॉलेजों को अस्थायी तौर पर बंद करने के निर्देश जारी किए गए हैं। ढाका के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाओं को भी आंशिक रूप से सीमित कर दिया गया है ताकि अफवाहों और गलत सूचनाओं को फैलने से रोका जा सके।



