
पाकिस्तान में औद्योगिक सुरक्षा मानकों की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। ताजा घटना में कराची की एक फैक्ट्री में बॉयलर फटने से 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई मजदूर गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। यह हादसा उस समय हुआ जब फैक्ट्री में नियमित उत्पादन कार्य चल रहा था और मजदूर अपनी-अपनी मशीनों पर काम कर रहे थे। अचानक बॉयलर में तेज आवाज के साथ विस्फोट हुआ, जिसकी ताकत इतनी अधिक थी कि पूरी इमारत हिल गई। धमाका इतना भीषण था कि कई कर्मचारी मौके पर ही मौत का शिकार हो गए, जबकि आसपास की दीवारें और मशीनें चकनाचूर हो गईं।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने घटना की जानकारी मिलते ही रेस्क्यू टीमों को मौके पर भेजा। बचाव अभियान के दौरान मलबे में दबे कई लोगों को निकाला गया, लेकिन कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है। घटना के बाद फैक्ट्री परिसर में चीख-पुकार मच गई और मृतकों के परिजन मौके पर पहुंचकर रोने-बिलखने लगे। इस हादसे ने एक बार फिर पाकिस्तान की इंडस्ट्रियल यूनिट्स में सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि देश में अधिकतर फैक्ट्रियों में पुरानी मशीनें और खराब बॉयलर का उपयोग किया जाता है, जिनकी समय-समय पर जांच नहीं होती। यही कारण है कि ऐसे हादसे बार-बार होते रहते हैं।
कराची पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े औद्योगिक हादसों का गवाह रहा है। चाहे 2012 का कराची गारमेंट फैक्ट्री फायर हो या हालिया केमिकल ब्लास्ट—हर बार जांच कमेटियां बनती हैं, लेकिन परिणाम बहुत कम देखने को मिलते हैं। इस बार भी प्रारंभिक जांच में तकनीकी खराबी और मेंटेनेंस की कमी को मुख्य वजह माना जा रहा है, लेकिन मजदूर संगठनों का कहना है कि फैक्ट्री प्रबंधन भी बराबर का जिम्मेदार है, जो सुरक्षा उपकरणों और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का पालन नहीं करता।
हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन ने फैक्ट्री को तत्काल सील कर दिया है और बॉयलर निरीक्षण विभाग को विस्तृत जांच का आदेश दिया है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत करने को कहा है। हालांकि, पाकिस्तान में अक्सर ऐसी रिपोर्टें फाइलों में दबकर रह जाती हैं और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती।
यह त्रासदी केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि यदि पाकिस्तान अपनी औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं करता, तो मजदूरों की जान जोखिम में पड़ती रहेगी। यह हादसा सरकार, फैक्ट्री मालिकों और मजदूर संगठनों सभी के लिए एक कड़वा सबक है कि सुरक्षा से समझौता कभी नहीं होना चाहिए।



