
बिहार की राजनीति में नई सरकार के गठन के बाद कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा चिराग पासवान की भूमिका को लेकर हो रही है। हाल ही में जब उनसे डिप्टी सीएम बनाए जाने पर सवाल पूछा गया, तो चिराग पासवान ने बड़े ही सधे हुए अंदाज में कहा, “मैं और कितना लालची होऊंगा?” उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता सत्ता में बड़े पद पाने से ज्यादा सरकार को स्थिरता और सुशासन देना है। उन्होंने कहा कि जनता ने उन्हें जिस विश्वास के साथ समर्थन दिया है, वह उनके लिए किसी भी पद से ज्यादा महत्वपूर्ण है। चिराग ने अपनी पार्टी एलजेपी (रामविलास) की भूमिका को भी स्पष्ट करते हुए कहा कि वे एनडीए सरकार के साथ मिलकर बिहार के विकास के लिए काम करेंगे और पद की राजनीति में उनका कोई व्यक्तिगत हित नहीं है।
चिराग पासवान ने अपने चाचा और पार्टी नेता पशुपति कुमार पारस द्वारा दी गई बधाई पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि परिवार और विचारधारा दोनों उनके लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन व्यक्तिगत रिश्ते हमेशा बने रहने चाहिए। पारस द्वारा भेजी गई शुभकामनाओं पर चिराग ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह इस बधाई को परिवारिक रिश्ते की गरिमा के रूप में देखते हैं। इससे यह संकेत भी मिलता है कि एलजेपी परिवार में चल रही नाराज़गी धीरे-धीरे कम हो रही है और रिश्तों की पटरी दोबारा पट सकती है।
डिप्टी सीएम के सवाल पर चिराग ने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य बिहार के युवाओं, किसानों और गरीबों के लिए बेहतर नीतियां लाना है। वे चाहते हैं कि उनकी पार्टी को जो भी जिम्मेदारी मिले, वह उसे पूरी निष्ठा से निभाए। उन्होंने कहा कि सत्ता में भागीदारी सिर्फ मंत्रालयों की संख्या से नहीं, बल्कि काम और नीयत से तय होती है। चिराग पासवान ने इस दौरान मीडिया से भी अपील की कि वे अनावश्यक अटकलों को न बढ़ाएं और सरकार के सकारात्मक कदमों को अधिक महत्व दें।
अंत में चिराग ने जोर देते हुए कहा कि बिहार में बदलाव का समय है और वह इस बदलाव का हिस्सा बनना चाहते हैं। चाहे उनके पास कोई भी पद हो या न हो, वे हमेशा बिहार की जनता के लिए समर्पित रहेंगे। उनके इस संतुलित और परिपक्व बयान ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि चिराग पासवान अब एक ज़िम्मेदार और दूरदर्शी नेता के रूप में अपनी नई पहचान बना चुके हैं।



