
भारत और आर्मेनिया के बीच होने वाली लगभग ₹10,000 करोड़ की तेजस लड़ाकू विमानों की संभावित डील को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, आर्मेनिया ने LCA तेजस खरीदने के समझौते को अस्थायी रूप से रोक दिया है। बताया जा रहा है कि यह निर्णय दुबई एयर शो में हुए उस हादसे के बाद लिया गया जिसमें तेजस का ट्रेनर वर्ज़न क्रैश हो गया था। इस घटना ने आर्मेनिया के रक्षा विश्लेषकों और सरकार को परियोजना की विश्वसनीयता पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया। हालांकि भारत की ओर से इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह चर्चा रक्षा रणनीति और दोनों देशों के संबंधों पर गंभीर प्रभाव डाल रही है।
तेजस भारतीय वायुसेना और HAL की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। कई देशों ने इसमें रुचि दिखाई थी और आर्मेनिया उनमें सबसे आगे बताया जा रहा था। प्रस्तावित डील में 12 तेजस लड़ाकू विमान शामिल थे, जिनके साथ हथियार प्रणाली, ट्रेनिंग पैकेज और रखरखाव सहायता भी दी जानी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारत के लिए रक्षा निर्यात में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती थी, क्योंकि इससे भारतीय रक्षा उद्योग की वैश्विक साख और मजबूत होती। लेकिन दुबई हादसे के बाद आर्मेनिया ने “तकनीकी समीक्षा” के नाम पर अपनी निर्णय प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि तेजस का क्रैश किसी भी तरह से उसकी पूरी परियोजना की विश्वसनीयता को कम नहीं करता, क्योंकि परीक्षण और प्रशिक्षण चरण में दुनिया के किसी भी अत्याधुनिक विमान में ऐसी घटनाएँ होती रहती हैं। HAL और वायुसेना दोनों ने दर्जनों सफल उड़ानें और मिशन साबित किए हैं। बावजूद इसके, किसी अन्य देश का पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों की जांच करना स्वाभाविक है, विशेषकर तब जब सौदा इतना बड़ा और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हो।
भारत के लिए यह स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि सरकार तेजी से रक्षा निर्यात बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। तेजस को कई अंतरराष्ट्रीय फोरम पर प्रदर्शित किया गया और इसका प्रदर्शन काफी सराहा गया। आर्मेनिया की ओर से निर्णय रोकने की खबर भारत के रक्षा कूटनीति के लिए चुनौती और अवसर दोनों है—एक ओर इसे तकनीकी मजबूती और स्पष्टता से दोबारा विश्वास दिलाना होगा, वहीं दूसरी ओर अन्य संभावित खरीदार देशों को भी आश्वस्त करना होगा।



