आर्थराइटिस नहीं लेकिन जोड़ों में दर्द? जानिए कारण और बचाव के उपाय

अक्सर लोग यह सोचते हैं कि अगर उनके जोड़ों में दर्द है तो इसका मतलब आर्थराइटिस है, लेकिन यह हमेशा सही नहीं होता। एम्स (AIIMS) की डॉक्टरों के अनुसार, जोड़ों का दर्द आर्थराइटिस के बिना भी हो सकता है। इसके कई कारण हो सकते हैं। सबसे सामान्य कारणों में मांसपेशियों और टेंडन में सूजन, तनाव, अधिक थकान, चोट या गलत तरीके से भारी वस्तुएँ उठाना शामिल है। कभी-कभी विटामिन डी या कैल्शियम की कमी, खराब पोषण या शरीर में सूक्ष्म संक्रमण भी जोड़ों में दर्द पैदा कर सकते हैं।
इसके अलावा, मोटापा भी जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे दर्द होने की संभावना बढ़ जाती है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना या गलत बैठने की आदतें, जैसे कि कंप्यूटर पर काम करते समय झुक कर बैठना, भी जोड़ों और पीठ में दर्द का कारण बन सकती हैं। महिलाओं में मासिक धर्म और मेनोपॉज के समय हार्मोनल बदलाव भी जोड़ों के दर्द को प्रभावित कर सकते हैं।
एम्स की डॉक्टरों के अनुसार, इन दर्दों से बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव करना सबसे महत्वपूर्ण है। रोजाना हल्की-फुल्की एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग और योग जैसी गतिविधियाँ जोड़ों को लचीला और मजबूत बनाए रखती हैं। संतुलित आहार जिसमें प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा हो, जोड़ों और हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी है। लंबे समय तक बैठने की स्थिति से बचें और समय-समय पर हल्की टहली या स्ट्रेचिंग करें। अगर आप अधिक वजन वाले हैं, तो वजन कम करने की दिशा में कदम उठाना भी जोड़ों पर दबाव कम करता है।
डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि दर्द बढ़ने पर खुद दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लें। प्राकृतिक तरीकों के अलावा, फिजियोथेरेपी और हल्की मसाज भी मददगार हो सकती हैं। संक्षेप में, जोड़ों में दर्द हमेशा आर्थराइटिस का संकेत नहीं होता, लेकिन सही देखभाल और जीवनशैली में सुधार से इसे कम किया जा सकता है और भविष्य में गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।



