
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा 2025 कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है। भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देने वाले इस दौरे का इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था। अब यह साफ हो गया है कि पुतिन अपने 28 घंटे के संक्षिप्त लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण दौरे पर भारत पहुंच रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पुतिन सबसे पहले नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे, जहां उनका स्वागत पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उनके आगमन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच एक अनौपचारिक मुलाकात प्रस्तावित है, जिसमें दोनों नेता वर्तमान वैश्विक परिस्थिति, भारत-रूस संबंधों की मजबूती और भविष्य के सहयोग पर चर्चा करेंगे।
दौरे के दौरान पुतिन का प्रमुख कार्यक्रम भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होना है। यह बैठक दोनों देशों के रणनीतिक साझेदारी को और गहरा बनाने में महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस सम्मेलन में रक्षा उत्पादन, S-400 सिस्टम की डिलीवरी अपडेट, ऊर्जा संबंधी करार, आर्कटिक में सहयोग, चाबहार पोर्ट कनेक्टिविटी, और परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा, भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने और भुगतान प्रणाली को डॉलर के विकल्प में मजबूत बनाने पर भी प्रमुख रूप से विचार किया जाएगा।
पुतिन अपने दौरे के दौरान कुछ प्रमुख भारतीय उद्योगपतियों और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों से भी मुलाकात कर सकते हैं। भारत-रूस के बीच तकनीकी सहयोग, विशेषकर अंतरिक्ष और स्टार्टअप सेक्टर में संभावनाओं को बढ़ाने के लिए भी विशेष बैठकें निर्धारित की गई हैं। रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन, जैसे AK-203 राइफल और अन्य हाई-टेक हथियार प्रणालियों पर नए करार भी इस यात्रा का हिस्सा बन सकते हैं। इसके साथ ही पुतिन का राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम भी संभावित है, जो भारत-रूस की ऐतिहासिक मित्रता को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है।
28 घंटे के इस अत्यंत व्यस्त कार्यक्रम के बाद पुतिन अगले दिन देर शाम भारत से प्रस्थान करेंगे। यह दौरा न केवल दोनों देशों के बीच विश्वास को मजबूत करेगा बल्कि बदलते भू-राजनीतिक माहौल में भारत-रूस साझेदारी को नए आयाम देगा। कुल मिलाकर, यह यात्रा दोनों देशों के लिए आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाली है।



