
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में अब तक 18 नक्सलियों के ढेर होने की सूचना सामने आई है, जबकि तीन बहादुर जवान भी देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। यह मुठभेड़ बीजापुर के घने जंगलों में उस समय शुरू हुई जब सुरक्षाबलों ने नक्सलियों की मौजूदगी की पुख्ता जानकारी मिलने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। बताया जा रहा है कि नक्सलियों की ओर से पहले गोलाबारी की गई, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने बड़ी संख्या में माओवादी कैडरों को मार गिराया। यह ऑपरेशन कई घंटों तक चला, जिसमें DRG, STF और CRPF की विशेष इकाइयाँ शामिल थीं।
घटना के बाद इलाके में भारी संख्या में अतिरिक्त बल भेजा गया है, ताकि किसी भी तरह की प्रतिक्रिया या नक्सलियों की फिर से regrouping की कोशिशों को रोका जा सके। मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक सामग्री और नक्सली साहित्य बरामद किया गया है, जो इस बात का संकेत है कि वहां नक्सलियों का बड़ा ठिकाना सक्रिय था। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई हाल के महीनों में नक्सलियों के खिलाफ सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है और क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने में यह निर्णायक साबित होगी।
हालाँकि इस सफलता की कीमत सुरक्षा बलों को अपने तीन वीर जवानों की शहादत के रूप में चुकानी पड़ी। स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ राज्य और केंद्र सरकार ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी है और उनके परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस ऑपरेशन से नक्सलियों की मनोबल पर बड़ा असर पड़ेगा और इलाके में सुरक्षा बलों का दबदबा और मजबूत होगा।
बीजापुर और उसके आसपास के इलाकों में पिछले कई वर्षों से नक्सली गतिविधियाँ चुनौती बनी हुई थीं, लेकिन हाल के समय में लगातार चल रहे कॉम्बिंग ऑपरेशन और आधुनिक तकनीक की मदद से सुरक्षा बलों ने कई नक्सली कमांडरों को निशाना बनाया है। ताज़ा मुठभेड़ इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद को समाप्त करने की दिशा में सरकार और सुरक्षा बल निरंतर प्रयासरत हैं और आने वाले समय में ऐसे और भी बड़े अभियान देखने को मिल सकते हैं।



