प्रदूषण बन रहा लंग कैंसर की बड़ी वजह, शरीर में दिखें ये 8 संकेत तो तुरंत हों सतर्क

देश के कई शहरों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है और यही जहरीली हवा अब लंग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का बड़ा कारण बनती जा रही है। पहले जहां लंग कैंसर को केवल धूम्रपान करने वालों की बीमारी माना जाता था, वहीं अब साफ हो चुका है कि प्रदूषित हवा में लंबे समय तक सांस लेने से नॉन-स्मोकर्स में भी इसका खतरा कई गुना बढ़ गया है। हवा में मौजूद पीएम 2.5, पीएम 10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कार्सिनोजेनिक केमिकल्स फेफड़ों की कोशिकाओं को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।
लंग कैंसर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर मामूली लगते हैं और लोग समय रहते ध्यान नहीं देते। पहला लक्षण लगातार खांसी का होना है, जो दवाओं से भी ठीक न हो। दूसरा, सांस लेने में दिक्कत या हल्का चलने पर भी हांफ जाना। तीसरा संकेत सीने में लगातार दर्द या जकड़न का महसूस होना है। चौथा, खांसी के साथ खून आना, जिसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पांचवां लक्षण अचानक वजन कम होना और भूख न लगना है।
छठा संकेत थकान और कमजोरी का लगातार बने रहना, भले ही व्यक्ति पर्याप्त आराम करता हो। सातवां लक्षण बार-बार फेफड़ों का संक्रमण, जैसे निमोनिया या ब्रोंकाइटिस होना। आठवां और अहम संकेत आवाज में बदलाव या भारीपन है, जो लंबे समय तक ठीक न हो। ये सभी लक्षण शरीर का चेतावनी संकेत होते हैं कि फेफड़ों में कुछ गंभीर गड़बड़ी हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए अब समय रहते जांच और सावधानी बेहद जरूरी हो गई है। मास्क का नियमित उपयोग, घर के अंदर हवा शुद्ध रखने के उपाय, धूम्रपान से दूरी और समय-समय पर हेल्थ चेकअप लंग कैंसर के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं। अगर इनमें से कोई भी लक्षण लंबे समय तक बना रहे, तो बिना देर किए डॉक्टर से सलाह लेना ही समझदारी है, क्योंकि समय पर पहचान से लंग कैंसर का इलाज संभव है।



