
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर साफ शब्दों में दुनिया के सामने अपना मजबूत और अडिग रुख रखा। भारत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा, और इस सच्चाई को कोई भी झुठला नहीं सकता। UN के मंच से दिए गए इस बयान में भारत ने पाकिस्तान की तरफ से बार-बार उठाए जाने वाले कश्मीर मुद्दे को सिरे से खारिज कर दिया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान को पहले अपने देश में मानवाधिकारों, लोकतंत्र और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए, बजाय इसके कि वह भारत के आंतरिक मामलों में दखल दे।
भारत ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर से संबंधित सभी फैसले पूरी तरह से संवैधानिक, लोकतांत्रिक और देश के आंतरिक ढांचे के अनुसार लिए गए हैं। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विकास, शांति और स्थिरता की नई शुरुआत हुई है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और निवेश के क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिला है, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता।
UN में भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर भी घेरा। भारत ने कहा कि पाकिस्तान आज भी आतंकवाद को राज्य नीति के तौर पर इस्तेमाल करता है और खुद को पीड़ित बताकर दुनिया को गुमराह करने की कोशिश करता है। भारत ने दो टूक कहा कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करता, तब तक उसके किसी भी दावे को गंभीरता से नहीं लिया जा सकता।
भारत के इस सख्त बयान को कूटनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। इससे यह साफ संकेत गया है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किसी भी तरह के दुष्प्रचार को चुपचाप सहने वाला नहीं है। भारत ने यह भी दोहराया कि जम्मू-कश्मीर में शांति और सामान्य स्थिति लौट रही है और वहां के लोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
कुल मिलाकर, UN में भारत का यह बयान न केवल उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की मजबूत घोषणा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भारत वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ अपने हितों और सच्चाई का बचाव करने के लिए पूरी तरह तैयार है।



