
अमेरिका में ब्राउन यूनिवर्सिटी और MIT से जुड़ी गोलीबारी की घटनाओं के बाद इमिग्रेशन नीति को लेकर एक बार फिर सख्ती की चर्चा तेज हो गई है। खबरों के मुताबिक, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए ग्रीन कार्ड लॉटरी (Diversity Visa Program) को सस्पेंड करने का फैसला किया है। इस फैसले को अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा और अप्रवासन नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर इसकी पूरी समय-सीमा और शर्तों को लेकर स्पष्टता अभी भी सामने आनी बाकी है, लेकिन इसके संभावित असर को लेकर दुनियाभर में चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
ग्रीन कार्ड लॉटरी प्रोग्राम उन देशों के नागरिकों को मौका देता है, जहां से अमेरिका में प्रवासन अपेक्षाकृत कम रहा है। हर साल लाखों लोग इस लॉटरी के लिए आवेदन करते हैं। भारत के संदर्भ में देखें तो भारतीय आवेदकों की संख्या अधिक होने के कारण पहले से ही इस प्रोग्राम में चयन की संभावना सीमित रहती है। इसके बावजूद, यह उन लोगों के लिए एक वैकल्पिक रास्ता माना जाता रहा है, जो अमेरिका में स्थायी निवास का सपना देखते हैं।
अगर यह प्रोग्राम लंबे समय के लिए सस्पेंड रहता है, तो भारतीयों पर इसका सीधा असर सीमित लेकिन परोक्ष प्रभाव व्यापक हो सकता है। सीधे तौर पर देखा जाए तो भारत पहले से ही Diversity Visa के प्रमुख लाभार्थी देशों में शामिल नहीं है। लेकिन परोक्ष रूप से, अमेरिका की इमिग्रेशन नीति में बढ़ती सख्ती से H-1B, स्टूडेंट वीज़ा और फैमिली-बेस्ड इमिग्रेशन जैसे अन्य रास्तों पर भी दबाव बढ़ सकता है। इससे भारतीय प्रोफेशनल्स और छात्रों में अनिश्चितता बढ़ना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले अक्सर सुरक्षा और राजनीतिक संदेश देने के उद्देश्य से लिए जाते हैं। चुनावी माहौल में इमिग्रेशन हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहा है और ट्रंप की नीतियां पहले भी कड़े रुख के लिए जानी जाती रही हैं। ऐसे में ग्रीन कार्ड लॉटरी पर रोक को उसी दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।
भारतीय आवेदकों के लिए सलाह यही है कि वे केवल लॉटरी पर निर्भर न रहें और अन्य वैध इमिग्रेशन विकल्पों पर ध्यान दें। साथ ही, आधिकारिक अमेरिकी सरकारी घोषणाओं पर नजर बनाए रखना जरूरी है, ताकि किसी भी अफवाह या अधूरी जानकारी से बचा जा सके। आने वाले समय में यह साफ होगा कि यह फैसला अस्थायी है या लंबे समय तक लागू रहने वाला है।



