
भारत सरकार ने अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत को एक बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें केंद्र सरकार की हिंदी सलाहकार समिति का सदस्य नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति को हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रभावी उपयोग की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। कंगना रनौत लंबे समय से हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों पर मुखर रूप से अपनी बात रखती रही हैं, ऐसे में उनकी भूमिका इस समिति में खास मानी जा रही है।
हिंदी सलाहकार समिति का उद्देश्य केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में हिंदी के अधिकतम प्रयोग को बढ़ावा देना, भाषा से जुड़ी नीतियों पर सुझाव देना और हिंदी के विकास से संबंधित योजनाओं पर मार्गदर्शन करना होता है। इस समिति में साहित्य, कला, प्रशासन और जनजीवन से जुड़े प्रतिष्ठित लोगों को शामिल किया जाता है, ताकि हिंदी को सरल, प्रभावी और आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सके। कंगना रनौत का फिल्म और सार्वजनिक जीवन का लंबा अनुभव इस काम में उपयोगी साबित हो सकता है।
कार्यकाल की बात करें तो हिंदी सलाहकार समिति के सदस्यों का कार्यकाल सामान्यतः तीन वर्ष का होता है। इस अवधि में सदस्य नियमित बैठकों में भाग लेते हैं, सुझाव देते हैं और हिंदी भाषा के विकास से जुड़े विषयों पर सरकार को सलाह देते हैं। हालांकि, सरकार आवश्यकता के अनुसार कार्यकाल में बदलाव या पुनर्नियुक्ति भी कर सकती है।
कंगना रनौत ने अपनी नियुक्ति के बाद हिंदी भाषा और भारतीय भाषाओं के सम्मान की बात दोहराई है। उन्होंने पहले भी कई मंचों पर यह कहा है कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और पहचान की आत्मा है। ऐसे में उनसे यह उम्मीद की जा रही है कि वे समिति में रचनात्मक सुझाव देंगी और युवाओं के बीच हिंदी के प्रति सकारात्मक सोच को मजबूत करेंगी।



