सावधान! ठंड में अलाव तापना बन सकता है खतरा, सांस और त्वचा को होते हैं 5 बड़े नुकसान

सर्दियों के मौसम में ठंड से बचने के लिए अलाव तापना भारत में आम बात है। गांव से लेकर शहरों तक लोग खुले में लकड़ी, कोयला या कचरा जलाकर आग सेंकते हैं, जिससे तुरंत गर्माहट तो मिलती है, लेकिन इसके लंबे समय तक और बार-बार संपर्क में रहने से शरीर को गंभीर नुकसान भी हो सकता है। खासतौर पर सांस की सेहत और त्वचा पर अलाव का धुआं और तेज गर्मी बेहद नकारात्मक असर डालती है। पहला बड़ा नुकसान श्वसन तंत्र को होता है। अलाव से निकलने वाला धुआं, कार्बन मोनोऑक्साइड और सूक्ष्म कण (PM2.5) फेफड़ों में जाकर खांसी, सांस फूलना, एलर्जी और अस्थमा जैसी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। लंबे समय तक धुएं में बैठने से ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होने का खतरा भी रहता है। दूसरा नुकसान आंखों और नाक से जुड़ा है। धुएं के संपर्क से आंखों में जलन, पानी आना और नाक में एलर्जी या बार-बार छींक आने की समस्या हो सकती है। तीसरा बड़ा असर त्वचा पर पड़ता है। अलाव की तेज गर्मी से स्किन की नमी खत्म होने लगती है, जिससे ड्राइनेस, खुजली और रैशेज हो सकते हैं। संवेदनशील त्वचा वालों में जलन और लालिमा की शिकायत ज्यादा देखी जाती है। चौथा नुकसान यह है कि आग के बहुत पास बैठने से स्किन बर्न या झुलसने का खतरा रहता है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह और भी खतरनाक हो सकता है। कई बार कपड़ों में आग पकड़ने की घटनाएं भी सामने आती हैं। पांचवां और गंभीर नुकसान कार्बन मोनोऑक्साइड का प्रभाव है। बंद या कम हवादार जगह पर अलाव जलाने से यह गैस शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति को कम कर देती है, जिससे सिरदर्द, चक्कर, उलझन और गंभीर मामलों में जान का खतरा भी हो सकता है। इसलिए सर्दियों में अलाव तापते समय सावधानी बेहद जरूरी है। बेहतर है कि हीटर, गर्म कपड़े, कंबल और उचित वेंटिलेशन का सहारा लिया जाए। अगर अलाव जलाना जरूरी हो तो खुले स्थान में, सीमित समय के लिए और सुरक्षित दूरी बनाकर ही इसका उपयोग करें, ताकि ठंड से राहत के साथ सेहत भी सुरक्षित रह सके।



