Pongal 2026: जनवरी में पोंगल का त्यौहार, जानें तारीख और तैयारी के टिप्स

पोंगल दक्षिण भारत का एक प्रमुख कृषि आधारित त्यौहार है, जिसे खासकर तमिलनाडु में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व नए साल के आगमन और सूर्यदेव को समर्पित होता है। पोंगल का मतलब ही होता है “उबालना” या “भोजन उबाल कर परंपरा निभाना”। इसे मुख्यतः चार दिनों तक मनाया जाता है, जिनमें भोग और पारंपरिक उत्सव शामिल होते हैं। पोंगल का त्योहार किसानों की मेहनत और फसल के लिए आभार व्यक्त करने का प्रतीक है।
साल 2026 में पोंगल 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर घर की छत या यार्ड में नए बर्तन में ताजा दाल और चावल उबालते हैं। इस प्रक्रिया को ‘पोंगल पकाना’ कहा जाता है। पोंगल पकाने के दौरान नए चावल और ताजे गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है। यह रिवाज सूर्य देव को समर्पित होता है, ताकि आने वाले साल में समृद्धि और खुशहाली बनी रहे।
पोंगल के पहले दिन को भोग पोंगल कहा जाता है, जिसमें परिवार और मित्र मिलकर सूर्यदेव को भोग अर्पित करते हैं। दूसरे दिन मट्टु पोंगल के रूप में मनाया जाता है, जिसमें बैलों की पूजा और बैलदौड़ जैसी गतिविधियां होती हैं। तीसरे दिन को कनुम पोंगल कहा जाता है, जो रिश्तेदारों और पड़ोसियों के साथ मिलकर सामूहिक भोजन और मेल-मिलाप का दिन होता है। चौथे दिन थाई पोंगल या शेष उत्सव मनाए जाते हैं, जिसमें विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक आयोजन शामिल होते हैं।
इस बार पोंगल 2026 में मनाने के लिए परिवार पहले से ही तैयारी शुरू कर सकते हैं। घर की सफाई, रंगोली बनाना, पारंपरिक सजावट और पोंगल पकाने के लिए आवश्यक सामग्री पहले से जुटाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, तामिलनाडु और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों में विशेष मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है।
पोंगल केवल धार्मिक महत्व का ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व का भी त्यौहार है। यह परिवार और समाज के बीच एकता और खुशहाली बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। इस पर्व पर लोग परंपरागत वेशभूषा पहनते हैं, मिठाई और पकवान बनाते हैं और खासकर नए साल की शुरुआत को खुशी और उल्लास के साथ मनाते हैं।



