मोहम्मद शमी विवाद: कोच ने चयन समिति पर उठाए सवाल, अगरकर को सुनाई खरी-खोटी

भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को लेकर एक बार फिर चयन विवाद गरमा गया है। इस बार चर्चा की वजह शमी के कोच का वह बयान है, जिसमें उन्होंने मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर पर सीधा निशाना साधते हुए कहा—“और क्या करे वो?” कोच का मानना है कि शमी ने फिटनेस, अनुभव और प्रदर्शन के हर पैमाने पर खुद को साबित किया है, इसके बावजूद उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जाना समझ से परे है। कोच के मुताबिक, शमी ने घरेलू क्रिकेट में मैच फिटनेस हासिल की, नेट्स में लंबी गेंदबाजी की, और जब भी मौका मिला, अपनी धारदार स्विंग और सीम मूवमेंट से बल्लेबाजों को परेशान किया। ऐसे में सवाल उठता है कि चयन के लिए इससे ज्यादा और क्या अपेक्षा की जा सकती है।
कोच ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि चयन समिति को स्पष्ट मानदंड बताने चाहिए ताकि खिलाड़ियों को यह समझ आ सके कि टीम में वापसी के लिए किन शर्तों को पूरा करना जरूरी है। शमी जैसे सीनियर गेंदबाज, जिन्होंने विदेशों में भारत के लिए मैच जिताऊ प्रदर्शन किए हैं, उन्हें सिर्फ उम्र या हालिया चोटों के आधार पर बाहर रखना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। कोच का तर्क है कि तेज गेंदबाजों के करियर में चोटें आम होती हैं, लेकिन सही रिहैब और मैच फिटनेस के बाद उन्हें मौके मिलना चाहिए।
अजीत अगरकर पर निशाना साधते हुए कोच ने यह भी कहा कि चयनकर्ताओं को फॉर्म के साथ-साथ अनुभव और बड़े मैचों के दबाव में प्रदर्शन की क्षमता को भी तौलना चाहिए। शमी ने वर्ल्ड कप और टेस्ट क्रिकेट में कई बार टीम को संकट से निकाला है। ऐसे में युवा गेंदबाजों को मौका देना जरूरी है, लेकिन अनुभवी खिलाड़ियों को पूरी तरह किनारे करना टीम संतुलन के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
इस बयान के बाद क्रिकेट जगत में बहस तेज हो गई है। कुछ पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि चयन समिति भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है, जबकि कई विशेषज्ञ शमी के कोच के पक्ष में खड़े नजर आए। उनका कहना है कि अगर शमी पूरी तरह फिट हैं और घरेलू क्रिकेट में लय दिखा रहे हैं, तो उन्हें टीम में शामिल करने में हिचक क्यों? कुल मिलाकर, यह विवाद चयन नीति, पारदर्शिता और सीनियर खिलाड़ियों की भूमिका पर एक नई बहस छेड़ता है, जिसका जवाब आने वाले समय में चयनकर्ताओं के फैसलों से ही मिलेगा।



