
पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर ली है। ईडी के रडार पर राज्य के करीब 25 कारोबारी आ गए हैं, जिन पर भ्रष्टाचार से अर्जित काले धन को सफेद करने का गंभीर संदेह जताया जा रहा है। एजेंसी को आशंका है कि इन कारोबारियों ने शेल कंपनियों, फर्जी लेन-देन और हवाला नेटवर्क के माध्यम से अवैध धन को वैध बनाने की कोशिश की। इस मामले को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत जांचा जा रहा है और आने वाले दिनों में पूछताछ व छापेमारी की कार्रवाई तेज हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, ईडी को कई संदिग्ध बैंक खातों, रियल एस्टेट निवेश और बड़ी नकद लेन-देन की जानकारी मिली है। जांच में सामने आया है कि कुछ कारोबारियों ने सरकारी ठेकों, खनन, निर्माण, परिवहन और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मामलों में कथित तौर पर रिश्वत और कमीशन के जरिए धन अर्जित किया। इसके बाद इस धन को फर्जी कंपनियों, ट्रस्टों और रिश्तेदारों के नाम पर किए गए निवेशों के जरिए घुमाया गया। ईडी अब इन लेन-देन की पूरी मनी ट्रेल खंगाल रही है।
एजेंसी ने पहले ही कई दस्तावेज और डिजिटल सबूत जुटा लिए हैं, जिनमें बैंक स्टेटमेंट, संपत्ति से जुड़े कागजात और ई-मेल संवाद शामिल हैं। बताया जा रहा है कि कुछ कारोबारियों से पहले भी पूछताछ की जा चुकी है, जबकि अन्य को जल्द समन भेजे जा सकते हैं। ईडी की नजर खास तौर पर उन लोगों पर है, जिनकी आय घोषित आय से कहीं अधिक पाई गई है।
इस कार्रवाई को बंगाल में चल रही भ्रष्टाचार विरोधी जांच की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले भी राज्य में कई हाई-प्रोफाइल मामलों में ईडी ने सख्ती दिखाई है, जिससे राजनीतिक और कारोबारी हलकों में हलचल मची हुई है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेर रहे हैं, वहीं सत्तारूढ़ दल इसे एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप बता रहा है।
फिलहाल ईडी की जांच जारी है और आने वाले समय में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है। यदि आरोप साबित होते हैं तो इन कारोबारियों की संपत्तियों की कुर्की के साथ-साथ गिरफ्तारी भी हो सकती है, जिससे बंगाल के कारोबारी जगत में बड़ा असर पड़ सकता है।



