उत्तर प्रदेश में टीबी का बड़ा खुलासा: 7 लाख मरीज मिले, 2.18 लाख बिना लक्षण

उत्तर प्रदेश में क्षय रोग (टीबी) को लेकर एक अहम और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राज्य में चले व्यापक टीबी खोज एवं नियंत्रण अभियानों के दौरान लगभग सात लाख टीबी मरीजों की पहचान की गई है। इनमें से करीब 2.18 लाख मरीज ऐसे पाए गए जिनमें टीबी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं थे, फिर भी जांच में उनके संक्रमित होने की पुष्टि हुई। यह आंकड़े जहां एक ओर बीमारी की गंभीरता को दर्शाते हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी बताते हैं कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे सक्रिय सर्विलांस और स्क्रीनिंग अभियानों से छिपे हुए मरीजों तक पहुंच संभव हो सकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार बिना लक्षण वाले टीबी मरीज सबसे अधिक खतरनाक हो सकते हैं, क्योंकि वे खुद को स्वस्थ मानते हुए इलाज नहीं कराते और अनजाने में संक्रमण फैलाते रहते हैं। इन्हीं को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने घर-घर जाकर जांच, मोबाइल एक्स-रे वैन, बलगम जांच और हाई-रिस्क समूहों की स्क्रीनिंग जैसे कदम उठाए। इसका परिणाम यह हुआ कि बड़ी संख्या में ऐसे मरीज सामने आए, जो सामान्य स्थिति में कभी जांच तक नहीं कराते।
राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इन मरीजों को तुरंत राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत इलाज से जोड़ा गया है। दवाइयों की नियमित आपूर्ति, पोषण सहायता योजना और डिजिटल निगरानी के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मरीज बीच में इलाज न छोड़ें। खास तौर पर बिना लक्षण वाले मरीजों के लिए काउंसलिंग पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वे बीमारी की गंभीरता समझें और पूरा इलाज लें।
टीबी को वर्ष 2025 तक खत्म करने के लक्ष्य की दिशा में यह अभियान उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि चुनौती अभी भी बड़ी है, क्योंकि इतनी बड़ी आबादी वाले राज्य में संक्रमण की चेन तोड़ना आसान नहीं है। इसके लिए जन-जागरूकता, समय पर जांच, सामाजिक सहयोग और इलाज की निरंतरता बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह सक्रिय रूप से मरीजों की पहचान होती रही और बिना लक्षण वाले मामलों पर विशेष ध्यान दिया गया, तो आने वाले वर्षों में टीबी के मामलों में तेजी से कमी लाई जा सकती है। उत्तर प्रदेश में मिले ये आंकड़े एक चेतावनी भी हैं और एक उम्मीद भी—चेतावनी इसलिए कि बीमारी अभी खत्म नहीं हुई है, और उम्मीद इसलिए कि सही रणनीति से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।



