
दिल्ली में मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने पार्टी की चर्चित सांसद महुआ मोइत्रा और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। TMC सांसदों का यह प्रदर्शन केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने और विपक्ष की आवाज को दबाने के आरोपों को लेकर था। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की और गृह मंत्रालय से जवाबदेही की मांग की।
TMC नेताओं का कहना था कि हाल के दिनों में विपक्षी शासित राज्यों, खासकर पश्चिम बंगाल के साथ केंद्र सरकार का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा है। महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है और लोकतंत्र की बुनियादी आत्मा पर हमला हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब संसद के भीतर आवाज उठाई जाती है तो उसे दबाने की कोशिश होती है और अब सड़कों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर भी हिरासत में लिया जा रहा है।
वहीं, डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि यह प्रदर्शन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस कार्रवाई यह दिखाती है कि सरकार असहमति से कितनी असहज है। TMC सांसदों का दावा है कि उन्हें गृह मंत्रालय के बाहर अपनी बात रखने का पूरा अधिकार था, लेकिन बिना किसी उकसावे के उन्हें हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में इसलिए लिया गया क्योंकि वे निषिद्ध क्षेत्र में प्रदर्शन कर रहे थे और इससे सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी। हालांकि कुछ समय बाद सभी नेताओं को छोड़ दिया गया। हिरासत से बाहर आने के बाद TMC सांसदों ने कहा कि वे डरने वाले नहीं हैं और केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। विपक्षी दलों ने भी TMC सांसदों के समर्थन में बयान दिए हैं और केंद्र सरकार की आलोचना की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में केंद्र और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है। दिल्ली में हुआ यह प्रदर्शन न सिर्फ एक राजनीतिक विरोध था, बल्कि यह संदेश भी था कि विपक्ष अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करता रहेगा।



