2017 से पहले कम FDI, अब उत्तर प्रदेश बना स्टार्टअप और निवेश का नया हब

उत्तर प्रदेश आज देश के सबसे तेजी से उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल हो चुका है। वर्तमान समय में प्रदेश में 18 हजार से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं, जो आईटी, एग्रीटेक, हेल्थटेक, फिनटेक, ई-कॉमर्स, एजुकेशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे कई क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। यह स्थिति 2017 से पहले बिल्कुल अलग थी, जब उत्तर प्रदेश को निवेशकों की पहली पसंद नहीं माना जाता था और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का अंश भी बेहद कम था। उस दौर में बुनियादी ढांचे की कमी, नीतिगत अस्पष्टता और कानून-व्यवस्था को लेकर आशंकाओं के कारण निवेशक प्रदेश से दूरी बनाए रखते थे। लेकिन 2017 के बाद राज्य सरकार द्वारा किए गए व्यापक सुधारों ने इस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को प्राथमिकता देते हुए सिंगल विंडो सिस्टम, ऑनलाइन मंजूरी प्रक्रियाएं, स्टार्टअप पॉलिसी, इनक्यूबेशन सेंटर और फंडिंग सपोर्ट जैसी योजनाएं लागू की गईं। इसके साथ ही एक्सप्रेसवे नेटवर्क, एयरपोर्ट्स, लॉजिस्टिक्स हब और औद्योगिक कॉरिडोर के विकास ने निवेश के लिए मजबूत आधार तैयार किया। परिणामस्वरूप देशी ही नहीं, बल्कि विदेशी निवेशकों का भरोसा भी उत्तर प्रदेश पर बढ़ा और FDI में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। आज नोएडा, ग्रेटर नोएडा, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहर स्टार्टअप गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। यहां युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर नवाचार हो रहा है। स्टार्टअप्स न केवल आर्थिक विकास में योगदान दे रहे हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं। 2017 से पहले जहां उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य की छवि से जोड़ा जाता था, वहीं अब वही प्रदेश स्टार्टअप, निवेश और औद्योगिक विकास के मामले में नई पहचान बना चुका है। यह परिवर्तन स्पष्ट संकेत है कि सही नीतियां, मजबूत नेतृत्व और अनुकूल माहौल मिलकर किसी भी राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।



