
दुनिया में पासपोर्ट की ताकत किसी देश की अंतरराष्ट्रीय हैसियत, कूटनीतिक संबंधों और नागरिकों को मिलने वाली यात्रा सुविधाओं को दर्शाती है। आमतौर पर लोग मानते हैं कि अमेरिका, रूस या ब्रिटेन जैसे ताकतवर देशों का पासपोर्ट सबसे ज्यादा प्रभावशाली होगा, लेकिन हकीकत इससे अलग है। हाल के वैश्विक पासपोर्ट रैंकिंग सूचकों में एशिया का एक छोटा लेकिन विकसित देश लगातार शीर्ष पर बना हुआ है। इस देश का पासपोर्ट रखने वाले नागरिक बिना वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा के दुनिया के 190 से ज्यादा देशों में यात्रा कर सकते हैं, जो इसे दुनिया का सबसे पावरफुल पासपोर्ट बनाता है। यह देश है जापान, जिसने मजबूत अर्थव्यवस्था, स्थिर राजनीति और वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद छवि के कारण यह मुकाम हासिल किया है।
जापान के बाद सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों के पासपोर्ट भी काफी ताकतवर माने जाते हैं। इन देशों के नागरिकों को यूरोप, अमेरिका, एशिया और अफ्रीका के अधिकांश हिस्सों में बिना ज्यादा कागजी कार्रवाई के यात्रा करने की सुविधा मिलती है। यही वजह है कि इन पासपोर्ट्स की वैश्विक मांग और सम्मान बहुत ज्यादा है। दूसरी ओर, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश, जो कभी इस सूची में शीर्ष पर हुआ करते थे, अब कुछ पायदान नीचे खिसक गए हैं। सख्त इमिग्रेशन नीतियां और वैश्विक राजनीतिक बदलाव इसकी एक बड़ी वजह माने जाते हैं।
अगर भारत की बात करें तो भारतीय पासपोर्ट की स्थिति धीरे-धीरे मजबूत जरूर हुई है, लेकिन अभी भी यह टॉप लिस्ट से काफी नीचे है। मौजूदा रैंकिंग के अनुसार भारत का पासपोर्ट लगभग 80वें से 85वें स्थान के बीच आता है। भारतीय नागरिकों को करीब 60 से 65 देशों में वीजा-फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा मिलती है। हालांकि, सरकार लगातार दूसरे देशों के साथ वीजा समझौतों पर काम कर रही है, जिससे आने वाले वर्षों में भारत की रैंकिंग में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
कुल मिलाकर, पासपोर्ट की ताकत सिर्फ सैन्य या आर्थिक शक्ति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि वैश्विक विश्वास, कूटनीतिक रिश्तों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी टिकी होती है। जापान इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जबकि भारत के लिए यह संकेत है कि मजबूत विदेश नीति और वैश्विक साझेदारी से भविष्य में उसका पासपोर्ट भी और सशक्त बन सकता है।



