
पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वे कथित तौर पर बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को ₹10,000 लेकर भारतीय नागरिकता दिलाने का खेल कर रही हैं। बीजेपी का दावा है कि यही वजह है कि जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से छापेमारी की गई तो ममता बनर्जी घबरा गईं और इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताने लगीं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह केवल जांच एजेंसियों का डर नहीं, बल्कि अवैध गतिविधियों के उजागर होने की आशंका है।
बीजेपी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि ममता बनर्जी बंगाल को बांटकर या समाज में विभाजन पैदा कर चुनाव नहीं जीत सकतीं। पार्टी का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है और अवैध घुसपैठ को नजरअंदाज कर रही है, जिसका सीधा असर राज्य की सुरक्षा, जनसंख्या संतुलन और संसाधनों पर पड़ रहा है। बीजेपी का आरोप है कि राज्य सरकार वोट बैंक की खातिर राष्ट्रीय हितों से समझौता कर रही है।
ईडी की कार्रवाई को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को डराने की कोशिश की जा रही है, जबकि बीजेपी का तर्क है कि कानून अपना काम कर रहा है और अगर कोई निर्दोष है तो उसे जांच से डरने की जरूरत नहीं। बीजेपी नेताओं ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार, अवैध फंडिंग और नागरिकता से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर बंगाल में ध्रुवीकरण को हवा दे दी है। जहां एक ओर तृणमूल कांग्रेस केंद्र सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगा रही है, वहीं बीजेपी इसे कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बता रही है। आगामी चुनावों को देखते हुए यह साफ है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तीखा होगा। बीजेपी का संदेश स्पष्ट है कि वह बंगाल की राजनीति में कथित अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगी, जबकि ममता बनर्जी अपने समर्थकों के बीच इसे संघीय ढांचे और लोकतंत्र पर हमला बताकर पेश कर रही हैं। अब देखना यह होगा कि जनता इन आरोप-प्रत्यारोपों को किस नजर से देखती है और चुनावी नतीजों में इसका क्या असर पड़ता है।



