कोर्ट-कचहरी नहीं, राहत की राह चुनें: बिजली बिल बकाएदारों से कॉरपोरेशन अध्यक्ष की अपील

कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने बिजली बिल के बकाएदार उपभोक्ताओं से अपील करते हुए कहा है कि वे कोर्ट-कचहरी का रास्ता अपनाने के बजाय राहत और समाधान की राह चुनें। उन्होंने कहा कि बिजली वितरण निगम का उद्देश्य किसी उपभोक्ता को परेशान करना नहीं, बल्कि उन्हें सुविधाजनक और न्यायसंगत तरीके से बकाया निपटाने का अवसर देना है। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक बकाया रहने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त ब्याज, पेनल्टी और कानूनी खर्च का बोझ बढ़ जाता है, जिससे समस्या और जटिल हो जाती है। ऐसे में समय रहते निगम द्वारा चलाई जा रही समाधान योजनाओं का लाभ उठाना ही समझदारी है।
उन्होंने बताया कि निगम समय-समय पर बकाया निपटान के लिए विशेष अभियान और एकमुश्त समाधान योजनाएं (OTS) लेकर आता है, जिनमें उपभोक्ताओं को ब्याज और सरचार्ज में छूट मिलती है। इन योजनाओं के माध्यम से उपभोक्ता आसान किस्तों में भुगतान कर सकते हैं और बिजली कनेक्शन से जुड़ी कानूनी परेशानियों से बच सकते हैं। अध्यक्ष ने कहा कि कोर्ट में जाने से न तो उपभोक्ता को तुरंत राहत मिलती है और न ही निगम को, बल्कि दोनों का समय और संसाधन व्यर्थ होता है।
कॉरपोरेशन अध्यक्ष ने यह भी कहा कि बिजली एक आवश्यक सेवा है और इसका सुचारू संचालन तभी संभव है जब उपभोक्ता समय पर बिल का भुगतान करें। भुगतान में देरी से न केवल वितरण व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि ईमानदार उपभोक्ताओं पर भी अप्रत्यक्ष भार पड़ता है। इसलिए निगम का प्रयास है कि बकाएदार उपभोक्ताओं को जागरूक किया जाए और उन्हें विवाद के बजाय संवाद और समाधान के लिए प्रेरित किया जाए।
उन्होंने उपभोक्ताओं से आग्रह किया कि वे नजदीकी बिजली कार्यालय, हेल्प डेस्क या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी बकाया स्थिति की जानकारी लें और उपलब्ध योजनाओं के तहत भुगतान करें। जिन उपभोक्ताओं को बिल में किसी प्रकार की त्रुटि लगती है, उनके लिए शिकायत निवारण की भी उचित व्यवस्था मौजूद है। अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि निगम की टीम हर संभव सहयोग के लिए तैयार है।
अंत में उन्होंने कहा कि “कोर्ट-कचहरी नहीं, राहत की राह” केवल एक अपील नहीं, बल्कि उपभोक्ता हित में उठाया गया कदम है। समय पर समाधान अपनाकर उपभोक्ता आर्थिक बोझ से बच सकते हैं और निगम के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रख सकते हैं।



